इथियोपिया के Hayli Gubbi इलाके में लंबे समय से निष्क्रिय ज्वालामुखी लगभग 10 हजार सालों में पहली बार फटा, जिससे राख और सल्फर डाइऑक्साइड की एक मोटी लेयर आसमान में तैर रही है। इस भारी विस्फोट के कुछ ही मिनटों के भीतर ही आसमान में गाढ़ा, काला और बेहद बारीक कणों वाला धुआं हजारों फीट की ऊंचाई तक फैल गया।
DGCA ने सभी एयरलाइंस को एक सख्त एडवाइजरी जारी की और साफ कहा कि जिन रूट्स में volcanic ash मौजूद है, उन क्षेत्रों से उड़ान भरने से बिल्कुल बचा जाए।ज्वालामुखी का धुआं दिखने में भले साधारण लगे, लेकिन असल में यह ज्वालामुखीय राख होती है, जिसमें छोटे-छोटे कांच जैसे कण होते हैं. हवा के तेज बहाव के साथ ऐसी राख काफी लंबी दूरी तक पहुंच सकती है और इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय एयर रूट्स भी इसके दायरे में आ गए है।
ज्वालामुखी की राख हवा के साथ बहते हुए उस अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र (FIR) तक पहुंच गई, जिसके ऊपर से भारत की कई उड़ानें रोजाना गुजरती हैं. जैसे ही यह जानकारी मिली भारत की एविएशन रेगुलेटरी संस्था DGCA तुरंत सतर्क हो गई।DGCA ने एयरलाइंस को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने फ्लाइट प्लान, रूट और ऊंचाई से जुड़े फैसले लगातार अपडेट होने वाली Volcanic Ash Advisories के आधार पर लें।
पायलटों, डिस्पैच टीम और केबिन क्रू को भी ज्वालामुखीय राख से जुड़े खतरों की जानकारी देकर पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है. उड़ान के दौरान यदि इंजन की आवाज़ में बदलाव दिखे, परफॉर्मेंस कम हो या केबिन में धुआं या कोई अनजान गंध महसूस हो तो तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।


