21 जुलाई 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते को मंजूरी दे दी. इसके तहत सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन करने की अनुमति मिल सकती है. यह 30 साल का समझौता है,
जिसमें अमेरिकी कंपनियों को सऊदी के नागरिक परमाणु कार्यक्रम को विकसित करने में अहम भूमिका दी जाएगी. यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं. ट्रंप ने यह समझौता सऊदी अरब को इजरायल मान्यता देने की शर्त के बिना किया है, जबकि बाइडेन प्रशासन यह शर्त रखता था।
समझौता ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका-सऊदी संबंधों को मजबूत करने के लिए किया गया है. इसका मकसद सऊदी को अमेरिका के करीब लाना है, ताकि ईरान के खिलाफ मोर्चा मजबूत हो.हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी अरब सीधे ईरान के खिलाफ युद्ध लड़ेगा. सऊदी के पास अभी परमाणु हथियार नहीं हैं. यह समझौता सऊदी को एक परमाणु-सक्षम राज्य बनने का रास्ता देता है, जो ईरान के खिलाफ एक स्ट्रैटेजिक बैलेंस पैदा करेगा।
इजरायल से इस फैसले को लेकर बेहद तीखी प्रतिक्रिया आई है।. हालांकि, सरकार की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन पूर्व रक्षा मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर विरोध किया है।


