पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉर्पोरेशन (पीएचएससी) ने प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में 200 सुरक्षा कर्मी तैनात करने के आधिकारिक आदेश जारी किए है। यह फैसला पीसीएमएस एसोसिएशन द्वारा डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से किए जा रहे संघर्ष और पिछले वर्षों में हुई हिंसक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के लिए ऐसा किया जा रहा है।नए आदेशों के तहत यह तैनाती जनवरी 2026 से शुरू होगी, जिससे अस्पतालों में सुरक्षित कार्य वातावरण बनाने की कोशिश की गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार इन सुरक्षा कर्मियों की भर्ती सिर्फ ‘पेस्को’ (PESCO) एजेंसी के माध्यम से की जाएगी।
जनवरी और फरवरी 2026 के पहले दो महीनों के लिए इनकी सैलरी प्रबंध ईआरएफ और अस्पतालों के यूजर चार्जेस फंडों से किया जाएगा।आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि बठिंडा, श्री मुक्तसर साहिब, एसबीएस नगर और माता कौशलया अस्पताल पटियाला अपने स्तर पर यूजर चार्जेस से भुगतान करेंगे।
मार्च 2026 के बाद इन कर्मचारियों की तनख्वाहों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में विशेष प्रबंध करने की जिम्मेदारी डायरेक्टर स्वास्थ्य सेवाओं के जेसीएफए को सौंपी गई है। जिला वार विवरण के अनुसार लुधियाना को सबसे ज्यादा 12, जबकि अमृतसर, जालंधर, बठिंडा और पटियाला को 11-11 सुरक्षा गार्ड आवंटित किए गए हैं।
बाकी जिलों में यह संख्या 7 से 9 के बीच रखी गई है। जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार द्वारा यह सुरक्षा 3 चरणों में प्रदान की जाएगी। फिलहाल पहले चरण में जिला स्तर के अस्पतालों को यह सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके बाद इसे ब्लॉक और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स तक बढ़ाया जाएगा।पंजाब के अस्पतालों में सुरक्षा की जरूरत क्यों पड़ी, इसका अंदाजा साल 2024-25 के आंकड़ों से लगाया जा सकता है।
इस दौरान प्रदेश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और ड्यूटी स्टाफ के साथ करीब 60 बार हाथापाई और झगड़े के मामले सामने आए। इनमें से 20 के करीब गंभीर मामलों में पुलिस को एफआईआर भी दर्ज करनी पड़ी। इन घटनाओं के कारण मेडिकल स्टाफ में भारी डर का माहौल था, जिसके कारण सितंबर 2024 में डॉक्टरों को हड़ताल जैसा सख्त कदम उठाना पड़ा था।


