विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 6 अक्तूबर, 2025 को जारी इन गाइडलाइन्स के तहत, देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अब अपनी वेबसाइट पर पब्लिक सेल्फ-डिस्क्लोजर (Public Self-Disclosure) यानी सार्वजनिक रूप से खुद जानकारी देना अनिवार्य होगा।
नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य संस्थानों की जानकारी को छात्रों, अभिभावकों और आम जनता के लिए आसानी से सुलभ बनाना है। UGC द्वारा जारी “Guidelines on Public Self-Disclosure by Higher Education Institutions” नामक इस फ्रेमवर्क के तहत, सभी संस्थानों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर निम्नलिखित जानकारी अनिवार्य रूप से प्रकाशित करनी होगी। संस्थान को कौन सी ग्रेडिंग (Accreditation) मिली है, कितने टीचर हैं, कितने छात्र हैं, और कौन-कौन से कोर्स कराए जाते हैं।
संस्थान में फीस कितनी है, और उनके पास कितना पैसा आता-जाता है, इसका पूरा हिसाब-किताब (Financial Audits) भी बताना होगा। कॉलेज या यूनिवर्सिटी में क्या-क्या सुविधाएं हैं और वहां रिसर्च (Research) का क्या काम हो रहा है, यह सब भी बताना होगा।यह नया नियम क्यों लाया गया?UGC के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 का हिस्सा है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए आसानी: अब छात्र और उनके माता-पिता एडमिशन लेने से पहले किसी भी संस्थान के बारे में सारी जानकारी आसानी से देख पाएंगे और सही फैसला ले सकेंगे। जब सारी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी, तो संस्थानों के लिए कुछ भी छिपाना मुश्किल होगा। इससे शिक्षा में ईमानदारी और अच्छा मैनेजमेंट (Good Governance) बढ़ेगा।इस कदम से भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा और भी मजबूत होगा।UGC ने सभी संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द इस नियम का पालन करना शुरू कर दें।


