Monday, June 1, 2026

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दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा: ग्लोबल प्लेटफॉर्म COP29 में गूंजा प्रदूषण का मुद्दा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

NRI SANJH JALANDHAR (19 NOVEMBER)

दिल्ली की जहरीली हवा ने इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगामा मचा दिया है। अजरबैजान के बाकू में चल रहे COP29 सम्मेलन में दिल्ली के वायु प्रदूषण पर गंभीर चर्चा हुई। इस सम्मेलन में विशेषज्ञों ने दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त की। पर्यावरणविदों ने इसे एक वैश्विक समस्या करार दिया और स्वास्थ्य संकट के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।  इस क्लाइमेट समिट में दिल्ली पॉल्यूशन को लेकर इंटरनेशनल विशेषज्ञों ने कई चेतावनी दी।

धुंध में लिपटी दिल्ली: हालात बेहद खराब
दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 494 तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे खराब स्तर है। सुबह के समय कुछ इलाकों में AQI 500 से भी अधिक दर्ज किया गया। चारों ओर फैली धुंध और स्मॉग की मोटी परत ने लोगों की सांस लेना मुश्किल कर दिया है। सड़कों पर विजिबिलिटी इतनी कम हो गई है कि यातायात प्रभावित हो रहा है। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में वायु प्रदूषण की गंभीर श्रेणी में होने की पुष्टि हुई है। यह स्थिति न केवल पर्यावरण, बल्कि जन स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है।

COP29 में दिल्ली पर मंथन
COP29 के दौरान, विशेषज्ञों ने दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि जहरीली हवा का असर लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सम्मेलन में स्वास्थ्य आपातकाल और प्रदूषण से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कदम उठाने की अपील की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदूषण केवल दिल्ली की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया को प्रभावित कर रहा है। इसे रोकने के लिए देशों को सामूहिक प्रयास करना होगा। 

ला नीना और प्रदूषण का कनेक्शन
विशेषज्ञों ने बताया कि ला नीना (La Niña) के चलते हवा की गति धीमी हो गई है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में फंस रहे हैं। तापमान में गिरावट और हवा के ठहराव ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। इस वजह से दिल्ली-एनसीआर गैस चैंबर में तब्दील हो गया है। सम्मेलन में, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि वायु प्रदूषण केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है। उन्होंने कहा कि लाखों लोग जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं, जिससे हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियां हो रही हैं।  ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि फॉसिल फ्यूल के इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाए और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा दिया जाए।

बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर
COP29 में बच्चों के स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि शहरी इलाकों के बच्चों के फेफड़े ग्रामीण बच्चों की तुलना में 40% कमजोर होते हैं। प्रदूषण के कारण बच्चों में अस्थमा और अन्य सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वच्छ हवा का अधिकार हर बच्चे का है और इसे सुनिश्चित करना सरकारों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

कनाडा ने कहा गरीब देशों को मदद मिलनी चाहिए
Canada ने COP29 में कहा कि वायु प्रदूषण जैसी आपदाओं से निपटने के लिए गरीब देशों को मदद देना जरूरी है। उन्होंने अपने देश का उदाहरण देते हुए बताया कि 2023 में जंगल की आग के कारण 70% आबादी प्रभावित हुई थी। इस समस्या से निपटना समृद्ध देशों के लिए भी महंगा साबित हो रहा है। ऐसे में गरीब देशों को वित्तीय और तकनीकी मदद देना जरूरी है ताकि वह ऐसी आपदाओं का सामना कर सकें।

वायु प्रदूषण से दुनिया भर में 8.1 मिलियन मौतें
स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2024 के अनुसार, 2021 में वायु प्रदूषण से 8.1 मिलियन मौतें हुईं। इसमें से 2.1 मिलियन मौतें अकेले भारत में हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अब भी कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंकड़ा आने वाले सालों में और बढ़ सकता है। वायु प्रदूषण न केवल मानव जीवन, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। 2019 में, वायु प्रदूषण के कारण दुनिया को 8.1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।

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