Monday, June 1, 2026

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4 साल से बड़े बच्चे को हेलमेट जरूरी, पगड़ी धारकों को छोड़ किसी को छूट नहीं

NRI SANJH JALANDHAR (9 NOVEMBER)

दो पहिया वाहन पर महिलाओं को हेलमेट से छूट के मामले पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह केवल उन सिखों के लिए जो पगड़ी पहनते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 में 15 फरवरी 2022 को हुए संशोधन के मुताबिक चार साल से बड़े बच्चों समेत सभी के लिए हेलमेट जरूरी है। दो पहिया वाहन चालक और उसके पीछे बैठने वाले सभी को हेलमेट लगाना होगा।

चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल खेत्रपाल की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि एक्ट के मुताबिक हेलमेट से छूट सिर्फ पगड़ी पहनने वाले सिखों को ही है। इसके अलावा किसी महिला या पुरुष को हेलमेट पहनने से कोई छूट नहीं है। हाईकोर्ट ने पंजाब व हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वाली व पीछे बैठी महिलाओं के चालान का ब्योरा सौंपने का आदेश दिया है। मामले पर 4 दिसंबर के लिए अगली सुनवाई तय की गई है।

हाईकोर्ट ने सड़क हादसों व सुरक्षा को लेकर संज्ञान लेते हुए इस मामले में वर्ष 2017 में सुनवाई आरंभ की थी। इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया था कि 6 जुलाई 2018 को मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन कर केवल पगड़ी पहनने वाली सिख महिलाओं को हेलमेट से छूट का प्रावधान किया गया था। इसके तहत अन्य सभी महिलाओं के लिए हेलमेट अनिवार्य किया गया था भले ही वे सिख हो या नहीं। इसके बाद धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध आरंभ कर दिया गया। एसजीपीसी की तरफ से भी मामले को लेकर कोर्ट में अर्जी दायर की गई थी। एडीजीपी ट्रैफिक एएस राय ने इस बाबत कहा कि वह इस समय लुधियाना ड्यूटी पर तैनात होने की वजह से ऑर्डर नहीं पढ़ पाए हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सभी नियमों का गंभीरता से पालन करवाया जा रहा है।

यूटी व केंद्र को हेलमेट नियम बदलने पर आड़े हाथों लिया था: चंडीगढ़ प्रशासन के केंद्र सरकार से एडवाइजरी मांगी जिसके जवाब में केंद्र ने सिख महिलाओं को हेलमेट से छूट देने की राय दी। इसके बाद नियम को बदल दिया गया और फिर से सभी सिख महिलाओं को हेलमेट से छूट दे दी गई। हाईकोर्ट ने इस पर चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि सरकार इस तरह का प्रावधान कैसे कर सकती है। हाई कोर्ट ने कहा था कि हेलमेट से कैसे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। मामला महिलाओं की सुरक्षा का है जिसकी हमें चिंता है। केंद्र का रुख समझ से परे है।

एक्सीडेंट होने पर हेलमेट जान बचाने वाला हो…

मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 में संशोधन के मुताबिक हेलमेट सिर पर पहना ही न हो बल्कि बंधा भी होना चाहिए। इसके अलावा हेलमेट की क्वालिटी भी ऐसी होना चाहिए जो एक्सीडेंट होने पर सिर की गंभीर चोट से बचा सके। दो पहिया वाहन पर चार साल से ज्यादा आयु के बच्चे को भी हेलमेट पहनाया जाए।

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