पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की मार्च 2026 में होने वाली 8वीं, 10वीं और 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षाओं के लिए आखिरी समय की जल्दबाजी वाली प्रक्रिया ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्कूल प्रधानों में व्यापक रोष पैदा कर दिया है। बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों की शारीरिक तौर पर तसदीक करने की अपनी जिम्मेदारी से भागते हुए सारा बोझ शिक्षा विभाग पर डाल दिया है।
PSEB द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मार्च 2026 की परीक्षाओं के लिए स्कूलों को अलॉट किए गए परीक्षा केंद्रों, संबंधित बैंकों और प्रश्न पत्र संग्रह केंद्रों के विवरण 4 दिसंबर को स्कूल लॉगिन आईडी पर अपलोड किए गए थे। स्कूलों को कुछ दिनों के अंदर, 10 दिसंबर तक जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी शिक्षा) को अपने इतराज जमा कराने के निर्देश दिए गए थे।
जैसे ही बोर्ड ने पत्र जारी किया, कई स्कूलों ने अपने परीक्षा केंद्र रद्द करने के लिए अर्जियां जमा करवाईं। उनकी दलील थी कि नई इमारतों का निर्माण चल रहा है, जबकि बैठने की क्षमता कम हो गई है। इन दावों की जांच बोर्ड की अपनी टीमों द्वारा की जानी चाहिए थी।
हालांकि, अपनी टीम भेजने की बजाय बोर्ड ने यह काम शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों और स्कूल प्रिंसिपलों को सौंप दिया है। अब एक स्कूल प्रिंसिपल को दूसरे स्कूल का दौरा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है ताकि यह पुष्टि की जा सके कि केंद्र रद्द करने का कारण वैध है या नहीं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड छात्रों से परीक्षा के लिए मोटी फीस लेता है और सारे प्रबंध करने का दावा करता है। हालांकि हकीकत यह है कि परीक्षा के दौरान स्टाफ शिक्षा विभाग का होता है, और अब विभाग केंद्रों की तसदीक भी कर रहा है। बोर्ड सिर्फ आदेश जारी करने तक सीमित है। बोर्ड के पत्र के अनुसार, जिन स्कूलों में केंद्र स्थापित किए जाएंगे, उनके स्कूल प्रिंसिपल “सेंटर कंट्रोलर” होंगे और पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।
इसके अलावा, प्रश्न पत्रों की देखभाल और उत्तर पत्रियां जमा करने के लिए सुरक्षा उद्देश्यों से स्कूल लॉगिन आईडी का उपयोग किया जाएगा। अर्जी फॉर्म में प्रिंसिपल और सीनियर मोस्ट लेक्चरर/मास्टर का मोबाइल नंबर अपडेट करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया को तीन स्कूल विकल्प जमा करने और मुख्य दफ्तर से मंजूरी प्राप्त करने के बाद ही पूरा माना जाएगा।


