Tuesday, May 26, 2026

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ईडी द्वारा रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की 1120 करोड़ की संपत्ति अटैच

ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 से अधिक संपत्तियों, फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस और अनक्वोटेड इन्वेस्टमेंट्स में की गई हिस्सेदारी को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। कुल कुर्क की गई परिसंपत्तियों का मूल्य लगभग 1,120 करोड़ है। यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और यस बैंक धोखाधड़ी के मामले से जुड़ा हुआ है

ईडी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 7 प्रॉपर्टी, रिलायंस पावर लिमिटेड की 2 प्रॉपर्टी, रिलायंस वैल्यू सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की 9 प्रॉपर्टी, रिलायंस वैल्यू सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंसवेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, M/s Phi मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, M/s आधार प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड, M/s Gamesa इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर मौजूद FD और बैंक बैलेंस शामिल है। इसी के साथ अनक्वोटेड इन्वेस्टमेंट्स में की गई हिस्सेदारियां भी अटैच की गई है।

गौरतलब है कि ईडी इससे पहले भी RCOM, RCFL और RHFL के बैंक धोखाधड़ी मामलों में 8,997 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क कर चुका है। नई कार्रवाई के बाद समूह की कुल अटैच की गई संपत्तियां बढ़कर 10,117 करोड़ हो गई है। ईडी की जांच के अनुसार, अनिल अंबानी समूह की कई कंपनियों जैसे रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड द्वारा सार्वजनिक धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।

जांच में सामने आया कि साल 2017–2019 के दौरान Yes Bank ने RHFL के इंस्ट्रूमेंट्स में 2,965 करोड़ और RCFL के इंस्ट्रूमेंट्स में 2,045 करोड़ निवेश किए थे, जो बाद में NPA में बदल गए। दिसंबर 2019 तक RHFL का 1,353.50 करोड़ और RCFL का 1,984 करोड़ बकाया रह गया।इसके अलावा RHFL और RCFL ने कुल 11,000 करोड़ से अधिक का सार्वजनिक धन प्राप्त किया था, जिसे जटिल वित्तीय मार्गों के जरिए अनिल अंबानी समूह की कंपनियों तक पहुंचाया गया।

SEBI के नियमों के चलते रिलायंस निप्पन म्यूचुअल फंड सीधे तौर पर इन कंपनियों में निवेश नहीं कर सकता था इसलिए धन को Yes Bank के माध्यम से ‘सर्किटस रूट’ अपनाते हुए समूह की कंपनियों तक पहुंचाया गया। CBI द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने RCOM, अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ भी जांच शुरू की है।जांच के अनुसार, 2010 से 2012 के बीच समूह ने देशी-विदेशी बैंकों से बड़ी मात्रा में ऋण लिए, जिनमें 40,185 करोड़ बकाया हैं और 9 बैंकों ने इन्हें धोखाधड़ी करार दिया है।

कई कंपनियों ने एक बैंक से लिया कर्ज दूसरे बैंक के कर्ज चुकाने, संबंधित पक्षों को ट्रांसफर करने और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए इस्तेमाल किया, जो ऋण शर्तों का उल्लंघन था।ईडी ने पाया कि लगभग 13,600 करोड़ ‘एवरग्रीनिंग ऑफ लोन’ में 12,600 करोड़ संबंधित पक्षों को भेजने में और 1,800 करोड़ FD/MF में निवेश कर बाद में समूह कंपनियों में रूट करने में इस्तेमाल हुए कुछ धनराशि विदेशी रेमिटेंस के माध्यम से भारत से बाहर भी भेजी गई।

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