भारत पर लगाए गए 50% तक के आयात शुल्क के मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट में 251 पन्नों की विस्तृत सफाई पेश की है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम पूरी तरह से वैध, रणनीतिक और राष्ट्रीय हित में उठाया गया है।
ट्रंप प्रशासन ने बताया कि भारत पर 25 प्रतिशत “पारस्परिक शुल्क” और 25 प्रतिशत “अतिरिक्त शुल्क” लगाया गया है, जो मिलाकर 50 प्रतिशत की प्रभावी दर बनाता है। यह शुल्क 27 अगस्त से प्रभावी हो चुका है।अपील में कहा गया है कि यह निर्णय रूस-यूक्रेन युद्ध से उत्पन्न वैश्विक संकट और भारत की ऊर्जा नीति के संदर्भ में लिया गया है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि भारत द्वारा रूसी ऊर्जा उत्पादों की निरंतर खरीद अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देती है।
इसी कारण, IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह टैरिफ लगाया गया।251 पेज के दस्तावेज में ट्रंप प्रशासन ने यह भी तर्क दिया है कि यदि यह टैरिफ न लगाया जाता, तो अमेरिका को वैश्विक व्यापारिक मंचों पर गंभीर नुकसान झेलना पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि इस तरह के आर्थिक कदम अमेरिका की “राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यापारिक हित और वैश्विक प्रभाव” को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपील में यह भी बताया गया कि इसी नीति की बदौलत अमेरिका ने यूरोपीय संघ समेत छह प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ लगभग 2000 अरब डॉलर के व्यापार और निवेश समझौतों को अंतिम रूप दिया है।गौरतलब है कि इससे पहले वॉशिंगटन की एक अपीली अदालत ने ट्रंप द्वारा लगाए गए कई व्यापक टैरिफ को अवैध करार दिया था। हालांकि अदालत ने ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की छूट दी थी, जिसकी समय सीमा 14 अक्तूबर तय की गई थी। अब ट्रंप प्रशासन ने उसी फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।


