NRI SANJH JALANDHAR (8 DECEMBER)
सीरिया में हालात दिनोंदिन गंभीर होते जा रहे हैं। विद्रोहियों ने अब तक तीन प्रमुख शहरों—अलेप्पो, होम्स और दारा—पर कब्जा कर लिया है। दमिश्क की ओर बढ़ते हुए, विद्रोहियों ने सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इसी बीच खबरें आई हैं कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद अपने परिवार के साथ देश छोड़कर रूस भाग गए हैं। सीरिया सरकार ने इन दावों का खंडन करते हुए इसे मात्र अफवाह बताया है। हालांकि, सेना के अफसरों के हवाले से रॉयटर्स ने पुष्टि की है कि असद एक विशेष विमान से देश छोड़कर भागे हैं।
24 साल से सीरिया की सत्ता पर काबिज थे असद
बता दें कि राष्ट्रपति बशर अल-असद बीते 24 साल से सीरिया की सत्ता पर काबिज थे। बशर अल-असद के खिलाफ 2011 में विरोध शुरू हुआ। यह नागरिक युद्ध में बदल गया। इसके बाद इस मसले में कई विदेशी ताकतों की एंट्री हो गई। कई इस्लामी जिहादी ताकतें भी यहां कूद पड़ीं। मौजूदा समय में इस विद्रोह में कई गुट शामिल हैं। सबसे मजबूत विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम (HTS) है। यह सीरिया में अल कायदा से जुड़ा हुआ है, जिसे अमेरिका और अन्य लोग आतंकवादी संगठन मानते हैं।
विद्रोहियों का बढ़ता जा रहा दबदबा
27 नवंबर को विद्रोहियों और सीरियाई सेना के बीच शुरू हुए संघर्ष ने अब विकराल रूप ले लिया है। 1 दिसंबर को विद्रोहियों ने अलेप्पो पर कब्जा कर लिया, और उसके कुछ दिनों बाद होम्स और दारा पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया। दमिश्क से मात्र 90 किमी की दूरी पर दारा में विद्रोहियों का कब्जा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। विद्रोही होम्स और दारा समेत देश के कई शहरों की सड़कों पर खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं। हथियार लहरा रहे हैं और असद सरकार को हराने का जश्न मना रहे हैं।
भारत ने जारी की एडवाइजरी
सीरिया की स्थिति को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने नागरिकों से तत्काल देश छोड़ने और सीरिया यात्रा से बचने की सलाह दी है। दमिश्क स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क में रहने की सलाह दी गई है। भारतीय नागरिकों से कहा गया है कि ऐसे किसी भी स्थान पर नहीं जाएं, जहां पर विद्रोही एक्टिव हैं।
ट्रंप बोले- ये अमेरिका की लड़ाई नहीं
सीरिया में बिगड़ते हालात के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति DONALD TRUMP ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अमेरिका की लड़ाई नहीं है। वहीं, रूस, जो अब तक असद सरकार का समर्थन करता आया है, ने भी इस बार पर्याप्त मदद नहीं दी है।
विद्रोह का क्या होगा दुनिया पर असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि सीरिया पर नियंत्रण पश्चिम एशिया में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके परिणाम न केवल सीरिया बल्कि रूस, ईरान और अन्य पड़ोसी देशों पर भी इसका असर होगा। तेल की कीमतों में उछाल आ सकती है। इसके साथ ही कई देशों के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।


