Friday, April 24, 2026

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जानिए कौन था ‘खान यूनिस का जल्लाद’ याह्या सिनवार, जिसकी मौत पर पूरी दुनिया मना रहा जश्न, इसके किस्से सुनकर आप भी हो जाएंगे शॉक्ड

NRI SANJH JALANDHAR (18 OCTOBER)

 तारीख- 7 अक्टूबर 2023… यहूदियों के पवित्र दिन ‘सिमचत तोराह’ पूरे इजारयल में लोग जश्न मना रहे थे। इसी दौरान इजरायल (Israel) के इतिहास में सबसे भयानक आतंकवादी हमला होता है। हमास के लड़ाके इजरायल पर अचानक हमला कर देते हैं। इस लड़ाई के लिए इजरायल तैयार नहीं था। लिहाजा बॉर्डर से लगे शहरों में हमास (Hamas) के लड़ाके जमकर नंगा नाच करते हुए 40 से ज़्यादा अमेरिकी नागरिकों सहित लगभग 1,200 नागरिकों की हत्या कर देते हैं। महिलाओं को नग्न पर उनके जिस्म को नोंचने लगते हैं। उनके स्तन (वक्ष) को काटकर उन्हें मारकर कार के बोनट पर रखकर क्रूरता का नंगा नाच करते हैं। साथ ही 12 अमेरिकियों सहित 251 से ज़्यादा निर्दोष लोगों को बंधक बनाकर गाजा लेकर चले जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है ‘इजरायल का बदला।

 इसलिए बताया जा रहा कि क्योंकि इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता या कहें मास्टमाइंड हमास का सबसे खूंखार शख्स और वर्तमान हमास चीफ याह्या सिनवार था। याह्या सिनवार इसी साल अगस्त में इस्माइल हानिये की मौत के बाद हमास का मुखिया बना था। याह्या सिनवार को इजरायली सेना ने 17 अक्टूबर को मार गिराया। इसी के साथ ही इजरायल पर हुए इतिहास में सबसे भयानक आतंकवादी हमले का बदला भी पूरा कर लिया।

रिफ्यूजी कैंप में जन्मा, 22 साल जेल में रहा सिनवार

सिनवार का पूरा नाम याह्या इब्राहिम हसन सिनवार था। उसका जन्म गाजा पट्टी के दक्षिणी इलाके में स्थित खान यूनिस के शरणार्थी कैंप में हुआ था। याह्या के मां-बाप अश्केलॉन के थे। 1948 में इजराइल की स्थापना हुई और हजारों फिलिस्तीनियों को उनके पुश्तैनी घरों से निकाला गया, तो याह्या के माता-पिता भी शरणार्थी बन गए थे। दो इजरायली सैनिकों और चार फिलिस्तीनियों का अपहरण और उनकी हत्या करने के आरोप में सिनवार को 1989 में गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त याह्या की उम्र 19 साल थी। मुकदमा चला। बाद में उसे चार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गईं।

हालांकि, 2011 में इजराइली सैनिक गिलाद शालिट के बदले में 1000 से ज्यादा कैदियों की अदला-बदली के दौरान सिनवार को भी रिहा कर दिया गया था। तब तक सिनवार करीब 22 साल जेल में बिता चुका था।

खान यूनिस का जल्लाद की मिली थी उपाधी

याह्या सिनवार को कई नामों से जाना जाता हैय़ उसे कोई ‘हमास का ओसामा बिन लादेन’ कहता था, तो कोई ‘खान यूनिस (Khan Yunis) का जल्लाद। इजरायल उसे ‘आतंक का हिटलर’ कहता है। वो इतना क्रूर था कि हमास से गद्दारी और इजरायल से वफादारी के शक में फिलिस्तीनियों तक को तड़पा कर मारता रहा है। वो बच्चों के साथ खुलेआम बंदूकों की नुमाइश करता था। उनकी मासूमियत को आतंक के जहर से मार डालता है। उसके बाद बच्चों पर ज्यादती का इल्जाम इजरायल पर लगाता है। गाजा में फैला टनल नेटवर्क उसकी ताकत है, जिसमें उसके कई राज दफन हैं।

बुचर ऑफ खान यूनिस’, जिसे लादेन भी कहा जाता है

याह्या सिनवार को ‘बुचर ऑफ खान यूनिस’ भी कहा जाता है. 7 अक्टूबर के हमले के बाद इजरायली मीडिया ने उसकी तुलना कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन से की थी। इजरायल डिफेंस फोर्सेस के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेचट ने उसकी तुलना ‘बुराई का चेहरा’ से की थी। उसे ‘चलता फिरता मरा हुआ आदमी’ तक बताया था। सिनेवार का जन्म साल 1962 में साउथ गाजा के खान यूनिस में एक फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर में हुआ था। यही वजह है कि उसे ‘खान यूनिस का कसाई’ भी कहा जाता है। वो खुलेआम कत्लेआम करने से नहीं चूकता। 2014 में उसे ‘मृत’ घोषित कर दिया था, कुछ समय बाद यह एक अफवाह साबित हुई। साल 2015 में याह्या को अमेरिका ने आतंकी घोषित किया था। सिनवार को ईरान का करीबी भी माना जाता था।

साल 2015 में अमेरिका ने घोषित किया ‘ग्लोबल टेरेरिस्ट’

साल 1988 में इजरायली एजेंसियों ने याह्या सिनवार को गिरफ्तार किया था। उस वक्त याह्या की उम्र 19 साल थी. उसके खिलास केस चला और उसे चार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन साल 2011 में इजरायल और हमास के बीच हुए एक डील के तहत उसे रिहा कर दिया गया। साल 2015 में अमेरिकी विदेशी विभाग ने उसको ‘ग्लोबल टेरेरिस्ट’ घोषित किया था। कुछ समय पहले ही फ्रांस ने उसकी संपत्ति फ्रीज कर दी और उसे अपनी राष्ट्रीय प्रतिबंध सूची में शामिल कर दिया. इतने प्रतिबंध और विरोध के बावजूद उसका रसूख कम नहीं हुआ।

बाइडेन बोले- ये पूरी दुनिया के लिए खुशी का दिन

सिनवार के मारे जाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सिनवार ही 7 अक्टूबर के हमले का मास्टरमाइंड था। यह इजराइल, अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए एक अच्छा दिन है। वह हजारों इजराइलियों, फिलिस्तीनियों, अमेरिकियों और 30 से भी ज्यादा देशों के नागरिकों की मौत का जिम्मेदार था।

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