NRI SANJH JALANDHAR (27 MARCH)
दो दिन से ईडी जहां दूसरे राज्यों में बड़े स्तर पर रेड करके जांच कर रही है और उच्च अधिकारियों व मंत्रियों से पूछताछ कर रही है। उसी के चलते चंडीगढ़ और मोहाली में भी बुधवार को सुबह रेड की गई। लेकिन इस बार ये रेड शराब नीति घोटाले को लेकर नहीं की गई थी। बल्कि अमरुदों के बाग मे हुए घोटालों के लेकर की गई। जिसमें पंजाब सरकार द्वारा एक्वायर की जाने वाली जमीन में फर्जी तरीके से अमरूदों के बाग दिखाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में जांच की जा रही है। ईडी ने चंडीगढ़, मोहाली व फिरोजपुर समेत 22 जगह पर रेड की है।
जालंधर की टीमों ने की है रेड
ईडी जालंधर के अधिकारी इन टीमों में शामिल है। यह टीमें स्थानीय पुलिस को साथ लेकर आई है। साथ ही इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया है। इस दौरान जो जोग घरों पर मिले है। उन्हें अंदर ही बैठा लिया गया है। किसी को फोन आदि करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। वहीं, इस जांच में क्या निकलता है इसके बारे में शाम को ही ईडी का ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही पता चल पाएगा।
आईएएस वरूण रूजम के घर भी हुई रेड
ईडी ने पंजाब के आईएएस वरूण रूजम के घर में भी टीम भेजी थी। आरोप है कि उनकी पत्नी ने भी करोड़ों रुपए का मुआवजा फर्जी तरीके से हासिल किया है। इसके अलावा फिरोजपुर के डीसी राजेश धीमान की पत्नी भी केस में आरोपी है। वहीं, ईडी कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों व अन्य लोगों के घर पहुंची है। ईडी काफी समय से इस केस की जांच कर रही थी। गमाडा से सारा रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया गया था। वहीं मोहाली के रियल स्टेट व्यापारी भूपेंद्र सिंह के घर पर ईडी ने छापेमारी की है। अमरूदों के बाग घोटाले में उसे ही मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है। मोहाली के रियल स्टेट व्यापारी भूपेंद्र सिंह के घर पर ईडी ने छापेमारी की है।अमरूदों के बाग घोटाले में उसे ही मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार जैसे ही सुबह ईडी की रेड शुरू हुई तो पहले सूचना यह थी कि दिल्ली शराब घोटाले को लेकर जांच चल रही है। क्योंकि वरूण रूजम पंजाब के एक्साइज कमिश्नर है। साथ ही आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पंजाब भाजपा के एक शिष्टमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की थी। लेकिन अभी कुछ इस बारे में स्पष्ट नहीं हो पाया।
एयरपोर्ट रोड पर ग्रेटर मोहाली डेवलपमेंट अथॉरिटी की तरफ से एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा हुआ मामला है। अधिग्रहण जमीन का मुआवजा गमाडा ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के मुताबिक दिया था। उस जमीन में लगे अमरूद के पेड़ों की कीमत जमीन से अलग तौर पर अदा की थी। फलदार पेड़ों की कीमत बागवानी विभाग की तरफ से निर्धारित की जाती है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण कलेक्टर ने फलदार वृक्षों वाली जमीन की एक सर्वेक्षण सूची डायरेक्टर बागवानी को भेजकर पेड़ों की मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करवाई थी।
इस मामले में की गई है रेड
जमीन अधिग्रहण से पहले यहां पर कुछ लोगों ने अमरूदों के पौधे लगा दिए थे, लेकिन गमाडा के अधिकारियों के साथ मिलकर इनकी उम्र 4 से 5 साल दिखाई गई। जिस कारण इनका मुआवजा काफी ज्यादा बन गया था। इस तरह से कई लोगों ने मिलकर गलत तरीके से मुआवजा ले लिया था। विजिलेंस ने इसमें आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। लेकिन अदालत ने मुआवजा की राशि वापस जमा करवाकर उन्हें जमानत भी दे दी थी।


