अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाला बिल नवंबर से पहले प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास कराने में मुश्किल आ सकती है. अगर ऐसा होता है तो रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का खतरा फिलहाल टल सकता है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट से भारी बहुमत से मंजूर हो चुका यह बिल अब प्रतिनिधि सभा में बढ़ते विरोध का सामना कर रहा है और नवंबर के चुनाव तक अटक सकता हैइस बिल को लेकर दोनों पार्टियों के सांसदों में भी चिंता बढ़ रही है. सांसदों को डर है कि कानून ट्रंप को टैरिफ लगाने की ज्यादा व्यापक शक्तियां दे सकता है और इसका असर अमेरिकी बाजार में तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला यह बिल दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया था. ग्राहम यूक्रेन के मजबूत समर्थक रहे थे. प्रस्तावित कानून के तहत ट्रंप को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों के साथ-साथ रूस को ऊर्जा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले पांच प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
यूक्रेन समर्थक अमेरिकी सांसद इस बिल को रूस के खिलाफ दबाव बनाए रखने और यूक्रेन के प्रति अमेरिका के समर्थन को दिखाने के एक तरीके के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि अतिरिक्त अधिकार मिलने के बाद ट्रंप वास्तव में उनका इस्तेमाल करेंगे या नहीं, खासकर चीन के मामले मेंअमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने इस बिल को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दी थी।
इस मजबूत समर्थन को लिंडसे ग्राहम के प्रति उनके साथी सीनेटरों की श्रद्धांजलि के तौर पर भी देखा गया. जुलाई में यूक्रेन की यात्रा से लौटने के कुछ समय बाद ग्राहम की अचानक मौत हो गई थी. हालांकि, प्रतिनिधि सभा में बिल को सीनेट जैसी मजबूत स्वीकृति नहीं मिल रही है.हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने गुरुवार को संकेत दिया कि 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि कांग्रेस चुनाव से पहले बिल को मतदान के लिए सदन में लाया भी नहीं जा सकता।
. इसकी एक वजह यह है कि अगले दो महीनों में सांसदों के पास वॉशिंगटन में काम करने के लिए सीमित दिन ही है।हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मस्त ने बताया कि सांसद यह भी देख रहे हैं कि बिल का गैस की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा. फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सांसद मस्त के मुताबिक, अगर भारत और रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले दूसरे देशों को वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है
तो इससे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ी है।नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले यह मुद्दा रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक परेशानी का कारण बन सकता है, क्योंकि पार्टी कांग्रेस में अपने बहुमत को बनाए रखने की कोशिश करेगी. प्रस्तावित कानून में ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी जारी रखने का प्रावधान है.


