कांग्रेस के नेशनल प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे को 100 करोड़ रुपये के मानहानि केस में बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले पर रोक लगा दी है। मामला कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 के चुनावी घोषणापत्र से जुड़ा था, जबकि शिकायत पंजाब के संगरूर में दर्ज की गई थी।कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि तर्क दिया गया कि जिस राज्य में घोषणापत्र जारी किया गया था, उसके बाहर किसी दूसरे राज्य में ऐसा केस दर्ज करना कानूनी तौर पर सही आधार नहीं बनता।
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद खड़गे को राहत दी है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी घोषणापत्र किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। इसे तैयार करने के लिए पार्टी की तरफ से एक खास कमेटी बनाई जाती है।इसके लिए सिर्फ पार्टी प्रेसिडेंट को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अर्शदीप खडियाल ने आगे कहा कि कई बार विपक्षी पार्टियों के नेताओं की तरफ से कांग्रेस के सीनियर नेताओं के खिलाफ अपमानजनक और गाली-गलौज वाले बयान दिए गए हैं, लेकिन कांग्रेस ने कभी इसे राजनीतिक हथियार नहीं बनाया और न ही किसी के खिलाफ मानहानि का दावा किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले से साफ है कि यह केस राजनीतिक मकसद से दर्ज किया गया था।
संगरूर कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दलील दी कि बेलेबल वारंट जारी करने का आदेश और उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई कानून के मुताबिक नहीं है। इसलिए वारंट कैंसिल किया जाना चाहिए और शिकायत पर आगे की कार्रवाई भी रोकी जानी चाहिए।


