पंजाब में यूरिया घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। खन्ना के SSP डा. दर्पण आहलूवालिया ने मामले की पूरी जांच करने और दोषियों तक पहुंचने के लिए 5 सदस्यों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है। इस SIT में एक SP, तीन DSP और एक SHO को शामिल किया गया है। पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए अलग-अलग जगहों पर छापेमारी भी कर रही है। यह कार्रवाई एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर की शिकायत पर FIR दर्ज होने के बाद हुई है।
मामला पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन (वेरका) के भट्टियां (खन्ना) स्थित कैटल फीड प्लांट में इस्तेमाल होने वाले यूरिया से जुड़ा है। एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की टीम ने 17 जून को कैटल फीड प्लांट पर छापेमारी की थी। मौके पर 1340 बैग यूरिया मिला, जिसे टेक्निकल ग्रेड यूरिया बताया गया।
शक के आधार पर तीन सैंपल लेकर फर्टिलाइजर टेस्टिंग लैब में भेजे गए थे। लैब रिपोर्ट में तीनों सैंपल में नीम ऑयल मिला, जिससे साबित हुआ कि यह टेक्निकल ग्रेड यूरिया नहीं, बल्कि सरकार की तरफ से किसानों को सब्सिडी पर दिया जाने वाला नीम कोटेड एग्रीकल्चरल यूरिया था। नियमों के मुताबिक, टेक्निकल ग्रेड यूरिया में नीम ऑयल नहीं होता है।
FIR के मुताबिक, सब्सिडी वाले एग्रीकल्चरल यूरिया को टेक्निकल ग्रेड यूरिया बैग में भरकर कैटल फीड प्लांट को सप्लाई किया गया। इसके जरिए सरकार की तरफ से किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को निजी फायदे के लिए लिया जाना था।
सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कैटल फीड प्लांट के जनरल मैनेजर सरजीत सिंह भदौड़, दूसरे जिम्मेदार अधिकारियों और सप्लाई करने वाली कंपनियों मेसर्स इंडो ऑर्गेनिक्स, गिद्दड़बाहा और मेसर्स मनीषा ट्रेडिंग कंपनी, नई दिल्ली के मालिकों ने आपसी मिलीभगत से यह पूरी साजिश रची।


