विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट आज दोपहर 2:56 बजे पूरे विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हुई इस पवित्र प्रक्रिया के दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय बद्रीविशाल” के जयकारों से गूंज उठा।
कपाट बंद होने के साथ ही अब अगले 6 महीनों तक भगवान बद्रीनाथ के दर्शन मुख्य धाम में नहीं होंगे।कपाट बंद होने से ठीक पहले एक बेहद खास रस्म निभाई गई। देश के सबसे आखिरी गाँव माना तैयार किया गया “घृत कंबल” (घी में डुबोया हुआ विशेष ऊनी कंबल) भगवान बद्रीनारायण को ओढ़ाया गया।
मान्यता है कि यह घी से भिगोया हुआ कंबल भगवान को भीषण हिमालयी ठंड से पूरे सर्दियों के दौरान सुरक्षित रखता है।इस ऐतिहासिक और भक्तिमय पल को और भी खास बनाने के लिए मंदिर को 12 क्विंटल गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।
कपाट बंदी की प्रक्रिया के दौरान गढ़वाल राइफल्स का बैंड तैनात रहा, जिसने अपनी अंतिम धुनें बजाई।अब भगवान बद्रीनाथ छह महीने तक योगध्यान में लीन रहेंगे और अगले वर्ष 2026 में वैशाख माह में पुनः कपाट खुलेंगे।


