Tuesday, April 21, 2026

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किरु हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का मामला मैंने उठाया और मेरे घर ही CBI रेड करवा दी–सत्यपाल मलिक

NRI SANJH JALANDHAR (23 February)

जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि उनके घर पर सीबीआई रेड नहीं होनी चाहिए थी क्योंकि जिस मामले को लेकर ये कार्रवाई हुई है, उसमें तो वह व्हिसलब्लोअर थे। इंडियन एक्सप्रेस समाचार पत्र से बातचीत में सत्यपाल मलिक ने बताया कि उनके पैर में हुए संक्रमण का उनका इलाज चल रहा है। 

वीरवार को उनके घर पर सीबीआई ने जो रेड की है वो नहीं होनी चाहिए थी। क्योंकि जिस किरु हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के सिलसिले में उनके घर सीबीआई आई उसमें वो असल में “व्हिसलब्लोअर और शिकायतकर्ता थे।

मलिक ने कहा कि चार दिन पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन शायद सीबीआई को इस बात की जानकारी नहीं थी, इसलिए वो दिल्ली स्थित उनके आवास के साथ-साथ उनके कुछ रिश्तेदारों और परिचितों के यहां पहुंच गई।

उन्होंने बताया कि ये वही किरु मामला है जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें 150 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की गई थी लेकिन उन्होंने फाइल पर दस्तखत करने से मना कर दिया था। मगर मैंने जिन गुनहगारों के नाम लिए थे उनके खिलाफ कार्रवाई बजाय सीबीआई ने व्हिसलब्लोअर के खिलाफ ही कार्रवाई करने का फैसला किया। 

उन्होंने कहा कि कि सरकार अपने आलोचकों को चुप कराना चाहती है और बीते एक साल से मैंने किसान आंदोलन को लेकर जिस तरह सरकार से सवाल पूछे हैं, सरकार को वो पसंद नहीं हैं। किरु प्रोजेक्ट के आख़िरी कॉन्ट्रैक्ट पर साल 2019 में उस वक्त हस्ताक्षर हुए थे, जिस वक्त वो राज्पाल पद छोड़ चुके थे।

सत्यपाल मलिक 2017 में बिहार के राज्यपाल बने, जिसके बाद उन्हें 2018 में जम्मू कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया। अक्तूबर 2019 में उन्हें जम्मू कश्मीर छोड़कर बतौर राज्यपाल गोवा भेजा गया। इसके बाद उन्हें मेघालय में नियुक्त किया गया जहां वो अगस्त 2020 से अक्तूबर 2022 तक राज्यपाल के पद पर रहे।

सत्यपाल मलिक ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि मैं चार राज्यों में राज्यपाल रहा, जम्मू कश्मीर के बाद दो राज्यों के राजभवन में कार्यभार संभाला, क्या मैं इस तरह के भ्रष्टाचार का हिस्सा बनूंगा? अगर मैं वाकई में भ्रष्ट होता तो क्या केंद्र सरकार मुझे दो और राज्यों में राज्यपाल बना कर भेजती?

कथित तौर पर किसी अधिकारी ने सीबीआई को सबूत दिए हैं कि तत्कालीन राज्यपाल के आदेश पर निजी कंपनी को प्रोजेक्ट के लिए चुना गया, लेकिन ये पूरी तरह ग़लत आरोप है। ये निराधार हैं और छापा डालने की कार्रवाई बदले में की गई है।

उन्होंने सीबीआई छापे में बरामद हुई चीज़ों के बारे में जानकारी दी कि उन्हें उनके कर्मचारियों ने बताया है कि उनके घर से कुछ कागज़ बरामद किए गए हैं, लेकिन कोई कम्प्यूटर बरामद नहीं किया क्योंकि उन्होंने कभी कम्प्यूटर का इस्तेमाल नहीं किया।

सत्यपाल मलिक ने कहा कि वो इस तरह की कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे और इससे पहले ही उन्होंने अपनी आने वाली क़िताब “द ट्रूथ अबाउट कश्मीर” (कश्मीर के बारे में सच्चाई) के ड्राफ्ट को सुरक्षित स्थान पर रख दिया है।

उन्होंने कहा कि एक रैली में मैंने कश्मीर पर अपनी क़िताब का ज़िक्र किया था, इसलिए लोगों को इसके बारे में जानकारी है। मुझे अहसास हुआ कि मुझे 200 पन्नों की किताब का ड्राफ्ट घर पर नहीं रखनी चाहिए।

सीबीआई के छापे ने मेरा अंदेशा सही साबित कर दिया। एक बार चुनाव की तारीखों की घोषणा हो जाए और चुनावी आचार संहिता लागू हो जाए उसके बाद मैं अपनी किताब छपवाने की कोशिश करूंगा। कश्मीर पर लिखी इस किताब को छापने में कई प्रकाशक दिलचस्पी दिखा रहे हैं और मेरे साथ संपर्क में हैं।

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