NRI SANJH JALANDHAR (24 January)
पंजाब में कृषि विभाग के लगभग 900 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिसको लेकर खेतीबाड़ी अधिकारियों का पंजाब सरकार प्रति काफी रोष है और दफ्तरों में धरना प्रदर्शन किया गया। जालंधर खेतीबाड़ी धरने में खेतीबाड़ी अफसर एसोसिएशन, खेतीबाड़ी विकास अफसर एसोसिएशन,. खेतीबाड़ी विस्थार अफसर एसोसिएशन, खेतीबाड़ी डिप्टी निरिक्षण एसोसिएशन, आत्मा स्टाफ यूनियन के सदस्य मौजूद थे।
धरने को संबोधित करते हुए खेतीबाड़ी विकास अफसर के प्रधान डॉ रमनदीप ने कहा कि खेतीबाड़ी विभाग की तरफ से पूरी ईमानदारी के साथ सेवा कर रहे हैं और किसानों की सब्सिडी उनके खातों में डाली गई है। जिसका बकायदा पंजाब सरकार की तरफ से ऑ़डिट किया गया था। डॉ. रमनदीप ने बताया कि मशीनें गुम होने का जो इल्जाम अधिकारियों व कर्मचारियों पर लगाया जा रहा है। वह सरासर गलत है। डॉ सुरजीत सिंह और डॉ जसविंदर सिंह खेतीबाड़ी अफसर एसोसिएशन की तरफ से कहा गया कि पंजाब में पराली जलाने के मामले में बड़े स्तर पर कमी आई है।
जो कि मशीनों की मौजूदगी के कारण ही हुआ है। खेतीबाड़ी विस्थार अफसर एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ गुरभगत सिंह ने बताया कि मशीनरी किसानों की तरफ से जो रिश्तेदारों व किराए के लिए दी गई थी। जिसको की सरकार ने लापता मान लिया है। जतिन वर्मा, खेतीबा़ी डिप्टी निरिक्षण की तरफ से पंजाब सरकार के इस रवैय्या का विरोध किया है।
संयुक्त एक्शन कमेटी व सभी एसोसिएशन ने पंजाब सरकार से मांग की है कि जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उसे वापिस लिया जाए। अगर ऐसा नही होता है तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।
धारा 8 के तहत नोटिस जारी
पराली प्रबंधन करने वाली मशीनों के तहत किसानो को मशीनों पर देने वाली सब्सिडी की स्कीम के तहत 2018-19 और 2021-22 के बीच वितरित की गईं। सभी पराली प्रबंधन मशीनों के भौतिक सत्यापन के बाद जारी किया गया है। मशीनों का सत्यापन नवंबर 2023 में पूरा हुआ, जिसके बाद पंजाब सिविल सेवा (दंड और अपील) नियम 1970 की धारा 8 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिस में हर अधिकारी के खिलाफ गायब मशीनों की संख्या का जिक्र किया गया है।
ये है मामला
केंद्र सरकार की सब्सिडी से खरीदी गई 90,422 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों में से लगभग 11,000 मशीनें गायब पाई गई। जिसको लेकर खेतीबाड़ी अधिकारियों से पंजाब के अलग अलग जिलों से ऑडिट करवाया गया। जिसमें काफी मशीनें गायब पाई गई। लेकिन इस ऑडिट में पंजाब सरकार ने अधिकारियों को ही कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। जिसका विरोध पूरे पंजाब में ही हो रहा है।
आरोप है कि लगभग 140 करोड़ रुपये की मशीनें कभी किसानों तक नहीं पहुंचीं और कथित तौर पर फर्जी बिल जमा करके धन का गबन किया गया। चार साल के दौरान मशीनों की खरीद के लिए राज्य सरकार को 1178 करोड़ रुपए दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018-19 और साल 2021-22 में किसानों के बीच मशीनें बांटी गई थीं. यह आरोप लगाया गया है कि लगभग 140 करोड़ रुपये की मशीनें किसानों तक कभी नहीं पहुंचीं और कथित तौर पर फर्जी बिल जमा करके धन का गबन किया गया। इन चार साल के दौरान केंद्र सरकार ने मशीनों की खरीद के लिए राज्य सरकार को 1178 करोड़ रुपये दिये. खास बात यह है कि जिन जिलों में सबसे ज्यादा मशीनें गायब पाई गईं है, उनमें फरीदकोट, फिरोजपुर, अमृतसर, गुरदासपुर, फाजिल्का, बठिंडा, मोगा और पटियाला का नाम शामिल है।
इन जिलों में सबसे अधिक मशीनें गायब
फरीदकोट, फिरोजपुर, अमृतसर, गुरदासपुर, फाजिल्का, बठिंडा, मोगा और पटियाला शामिल हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की एक टीम ने एक क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया था और योजना के तहत स्थापित कस्टम-हायरिंग केंद्रों का पता नहीं लगा सकी थी।


