Monday, June 1, 2026

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Power off attorney का दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार ने उठाया कोस कदम, अब देनी होगी इतनी स्टांप ड्यूटी

ब्लड रिलेशन में जारी रहेगी पुरानी दरें
-POA नहीं देता मालिकाना हक, भुगतने पड़ते थे केस

NRI SANJH JALANDHAR (5 February)

जालंधर, पंजाब सरकार ने जायदाद की खरीद-फरोख्त को लेकर बनाए बनाई जाने वाली पावर ऑफ अटॉर्नी यानी मुख्तियारनामा के मिसयूज को रोकने के लिए ठोस कदम उठाया है। सरकार ने इंडियन स्टांप एक्ट 1989 में संशोधन करते हुए पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) पर 2 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लागू कर दी है। इस संबंधी नोटिफिकेशन भी लागू हो चुकी है और सोमवार को POA इसी मुताबिक बनाई गई।

सरकार का दावा है कि इससे POA के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। बहुत सारे केसों में मरने और मुकर जाने पर POA खत्म हो जाती है। पूरे पैसे देने के बावजूद लोग अपनी जायदाद के मालिक नहीं बन पाते हैं और 27 देशों के कानून मुताबिक उनको पूर्ण मालिक बनने का हक अधूरा रह जाता है, जबकि वह पूर्ण मालिक बनने के अधिकार रखते हैं। उल्टा उनको अनचाही मुकदमेबाजी से गुजरना पड़ता है।

सारी उम्र वह इन्हीं केसों में उलझे रहते हैं।
बता दें कि हर रोज सभी तहसीलों और सब तहसीलों में औसतन 2-3 पावर ऑफ अटॉर्नी बन रही हैं। अब इन पर नकेल सकी जाएगी। इतनी फीस भरने की बजाए लोग प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाएंगे और सरकार को भी इससे अच्छा खास रेवेन्यू होगा। POA के दुरुपयोग के कारण होने वाले कानूनी केसों में भी कमी आएगी।

ब्लड रिलेशन में नहीं लागू होगा नया नियम
पति-पत्नी, बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, पोता-पोती और दोहता-दोहती जैसे ब्लड रिलेशन में लोगों को POA पर अलग से 2 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी नहीं देनी होगी। ब्लड रिलेशन में एक दूसरे को पावर ऑफ अटॉर्नी देते समय पहले से चल रही स्टांप ड्यूटी POA आम के लिए 2000 और POA खास के लिए 1000 रुपए के अनुसार ही रजिस्टर करवा सकेंगे।

इन पर लागू होगी ड्यूटी
ब्लड रिलेशन से बाहर POA को डिसकरेज करने के लिए सरकार ने प्रयास किया है। अगर कोई इस तरह POA करवाना चाहता है या ऐसे POA में दर्ज जायदाद की पूरी जानकारी और इसका कुलेकटर रेट या दोनों पक्षों की तरफ से निर्धारित मूल्य जो भी ज्यादा हो दर्ज करना होगा। उस पर 2 फीसदी स्टांप ड्यूटी लगानी होगी।

मरने या मुकरने पर खत्म हो जाती है POA
पावर ऑफ अटॉर्नी देने या लेने वाले व्यक्ति, दोनों में एक के मुकर जाने या मर जाने पर POA खत्म हो जाती है। ऐसी स्थिति में चाहे सालों पहले, खरीददार या बेचने वाले की तरफ से जायदाद के पूरे पैसे और कब्जे का लेन देने भी हो चुका हो फिर भी उम्र भर की अनचाही मुकदमेबाजी में उलझना पड़ता है।

रजिस्ट्री ही ऑनरशिप का सही सबूत
माहिरों की मानें तो जायदाद की खरीद व बेच के दौरान पूरे पैसे का लेन-देन और कब्जा भी तब्दील कर लेने के बाद कानून मुताबिक उक्त जायदाद की केवल बे-नामा रजिस्ट्री ही ऑनरशिप का सबूत होती है। जिसके अनुसार रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी इंतकाल होता है। खरीददार जायदाद का मालिक बन जाता है, लेकिन काफी केसों में स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस और कई बार इंकम टैक्स/प्रॉपर्टी टैक्स से बचने के लिए बेनामा रजिस्टर करवाने की बजाए खरीददार और बेचने वाले की तरफ से जायदाद की पावर ऑफ अटॉर्नी ही करवा ली जाती है। जिससे की बचना चाहिए।

POA का रिवोकेबल डाक्यूमेंट होने के कारण होता है मिसयूज
POA हमेशा एक खारिज होने योग्य दस्तावेज (रिवोकेबल डाक्यूमैंट) ही रहता है। इसे कानून के मुताबिक ना खारिज होने योग्य दस्तावेज नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए ये ज्यादातर बहुत घातक दस्तावेज साबित होता है, क्योंकि POA केवल आपको एजेंट ही नियुक्त करता है ना कि आपको प्रॉपर्टी का मालिक बनाता है। इसलिए इसका मिसयूज होता है।

खरीददारों को कोर्ट कचहरी से मिलेगी निजात
ऐसा करने के साथ उस प्रथा से भी निजात मिलेगी, जिसमें गैर कानूनी कालोनी कटकर बिना एनओसी व अप्रूवल के ही रजिस्ट्रियां बंद होने के कारण, कालोनी काटने वाले की तरफ से रजिस्ट्री बे-नामा (जिस पर कानून में रोक लगी है) करवाने की बजाए खरीददार से पूरे पैसा लेने और कब्जा देने के बाद पावर ऑफ अटॉर्नी ही तसदीक करवा ली जाती है। ऐसे केसों में खरीददारों के लिए उम्र भर लंबी अदालती कार्रवाई और पापरा एक्ट अधीन क्रिमिनल केस तक दर्ज हो जाते हैं।

छोटे किसानों को धोखे से बचाएने का प्रयास
इसी तरह कई बार छोटे किसान की तरफ से प्रॉपर्टी कारोबार से जुडे डीलर से एक छोटा प्लाट खरीद लिया जाता है और रजिस्ट्री करवाने की बजाए पावर ऑफ अटॉर्नी ले ली जाती है। परंतु इस POA के जरिए एक से अधिक प्लाट बेच दिए जाते हैं। इसी कारण बाद में जायदाद संबंधी उक्त छोटे किसानों को बहुत दिक्कतें पेश आती हैं।

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