Arvind kejriwal ने RSS प्रमुख को किए 5 सवाल, आम नागरिक बन पूछे जवाब

NRI SANJH JALANDHAR (25 SEPTEMBER)

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 24 सितंबर 2024 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर 5 अहम सवाल पूछे। केजरीवाल ने यह पत्र एक आम नागरिक के रूप में लिखा है, जिसमें उन्होंने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर अपनी चिंताओं का इजहार किया है। उनका मुख्य उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र की रक्षा और इसे मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना है।

भ्रष्टाचार और सरकार गिराने पर उठाया सवाल
अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में पहला सवाल यह उठाया कि भाजपा सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं को विभिन्न प्रलोभनों और धमकियों से तोड़ा जा रहा है। उन्होंने पूछा, “क्या यह सही है कि ईडी और सीबीआई (ED-CBI) का डर दिखाकर निर्वाचित सरकारों को गिराया जाए?” इसके साथ ही, उन्होंने आरएसएस से यह पूछा कि क्या वे “अनैतिक तरीकों से सत्ता प्राप्त करने” की इस प्रवृत्ति को सही मानते हैं? 

केजरीवाल का दूसरा सवाल उन नेताओं से जुड़ा है जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक मंचों से भ्रष्ट कहा, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन नेताओं को भाजपा में शामिल कर लिया गया। उन्होंने 28 जून 2023 के एक उदाहरण का हवाला दिया, जब मोदी ने एक पार्टी और उसके नेता पर 70 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। इसके बाद, वही नेता भाजपा में शामिल हो गए और उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद भी दिया गया। 

भाजपा को सही दिशा में लाने की जिम्मेदारी RSS की 
अपने तीसरे सवाल में, केजरीवाल ने RSS की जिम्मेदारी पर सवाल उठाया कि क्या उन्होंने कभी प्रधानमंत्री को गलत कामों से रोकने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा कि भाजपा का जन्म आरएसएस की कोख से हुआ है और यह संघ की जिम्मेदारी है कि अगर भाजपा भटक जाए, तो उसे सही मार्ग पर लाया जाए।

जेपी नड्डा के बयान पर किए सवाल  
चौथा सवाल बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के उस बयान पर था जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा को अब आरएसएस की जरूरत नहीं है। केजरीवाल ने भागवत से पूछा कि इस प्रकार के बयानों पर संघ का क्या रुख है? क्या यह बयान संघ के अस्तित्व और उसकी भूमिका को कमजोर करता है?

 आरएसएस की भूमिका को लेकर किया अंतिम सवाल
आखिरी सवाल के रूप में, केजरीवाल ने पूछा कि क्या आरएसएस, भाजपा को सही दिशा दिखाने और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने में अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि राजनीति में परिवर्तन होते रहेंगे, लेकिन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।

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