पंजाब सरकार के सभी सिख मंत्रियों और सभी विधायकों ने सोमवार को बेअदबी कानून को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में उपस्थित हुए। इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सभी से बेअदबी कानून संबंधी जवाब मांगे।इससे पहले जत्थेदार ने सत्कारयोग्य एक्ट में आपत्तिजनक मदों और शब्दावली के बारे में विचार-विमर्श भी किया।
जत्थेदार गड़गज ने मंत्रियों और विधायकों को एक-दूसरे के खिलाफ दोषारोपण न करने की ताकीद की। जत्थेदार ने कहा कि यहां कोई भी पक्ष राजनीति नहीं करेगा, यह गुरु का मुद्दा है, इसलिए यहां पूर्ण मर्यादा का ध्यान रखा जाए।इस दौरान कई विधायकों ने माना कि उन्होंने बिना पढ़े बेअदबी कानून पर दस्तखत किए थे।
सभी के जवाब सुनने के बाद जत्थेदार ने कहा कि पंथ के फैसले सरकार नहीं, बल्कि श्री अकाल तख्त साहिब और सिख संगत तय करेगी।जत्थेदार ने हुक्म दिया कि सरकार एक महीने के अंदर कानून में संशोधन करे। इस दौरान जत्थेदार ने 5 आपत्तियां बताईं, जिन्हें कुलतार सिंह संधवां को सौंप दिया गया।
पांच सिंह साहिबानों की बैठक में जैसे ही जत्थेदार द्वारा यह फैसला सुनाया गया कि समूह सिख विधायकों और मंत्रियों का यह नैतिक फर्ज है कि वे एक महीने के अंदर विधानसभा के माध्यम से अकाल तख्त साहिब की सारी आपत्तियों को दूर करें, तो वहां मौजूद सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने एक स्वर में ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारे लगाकर इस फैसले की स्वीकृति दी।


