भारत की पेट्रोल और डीजल को लेकर चिंता आने वाले समय में कुछ कम हो सकती है. इसकी वजह दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला है. अगर भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बड़े समझौते होते हैं, तो भारत को कच्चे तेल के लिए केवल रूस और खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इसी कड़ी में वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज 3 से 7 जून तक भारत के दौरे पर हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, तेल आपूर्ति, निवेश और व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान कई अहम समझौते भी हो सकते हैंअमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन पर लगातार पड़ रहा है।
ऐसे हालात में भारत अपने ऊर्जा स्रोतों को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि किसी एक या दो देशों पर ज्यादा निर्भरता न रहे. वेनेजुएला तेल उत्पादन और भंडार के मामले में दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिना जाता है. हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के बीच भारत ने वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाया है।
इसी कारण भारत वेनेजुएला के तेल का प्रमुख खरीदार बनकर उभरा हैनयी दिल्ली पहुंचने के बाद डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि वह भारत आकर बेहद खुश हैं. उन्होंने भारत को एक साहसी, आध्यात्मिक और वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बताया. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए शांति, मित्रता और सहयोग का संदेश लेकर आया है।
साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दौरे के दौरान होने वाली बैठकें दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेंगी।डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि उनके भारत दौरे का एजेंडा काफी व्यापक और महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग के उन क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी, जो वेनेजुएला के लोगों की प्राथमिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते है।उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में होने वाली वार्ताएं सकारात्मक और परिणामदायी रहेंगी।


