इंडिगो एयरलाइंस के उड़ान संकट ने अब पूरे देश की हवाई यात्रा व्यवस्था को हिला दिया है, और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। देशभर के हवाई अड्डों पर हो रहा हाहाकार, उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को हो रही भारी परेशानी और पायलट संकट के दावों को लेकर एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी।
इस मामले की तत्काल सुनवाई की मांग पर कार्रवाई करते हुए भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील को अपने घर बुलाया है।सीजेआई सूर्यकांत ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि आज ही मामले की सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच का गठन किया जा सके।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि उड़ानों के रद्द होने का कारण पायलटों के लिए नए एफडीटीएल (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट) नियमों की गलत योजना है। याचिकाकर्ता ने इस संकट को यात्रियों के अनुच्छेद 21 के अधिकारों का उल्लंघन बताया है और प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा तथा मुआवजे की मांग की है।
एयरलाइन का संचालन लगातार चौथे दिन भी प्रभावित रहा, हालांकि शुक्रवार को विमानन निगरानी संस्था डीजीसीए ने इसे सामान्य करने में मदद के लिए कई छूटें दी थीं।इंडिगो ने अकेले शुक्रवार को एक हजार से अधिक उड़ानें रद्द की थीं।उड़ानों के रद्द होने से दूसरी एयरलाइन कंपनियों ने अपना किराया बढ़ा दिया है और ट्रेनों में अचानक भीड़ बढ़ गई है।
इस दौरान डीजीसीए ने बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द होने के कारणों की व्यापक समीक्षा और मूल्यांकन के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन भी किया है। यात्रियों को राहत देने के लिए, स्पाइसजेट ने 100 अतिरिक्त उड़ानें शुरू की हैइसके अलावा, रेलवे ने भी कई स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है, जिसमें 37 ट्रेनों में 116 अतिरिक्त कोच लगाए जा रहे हैं। नागरिक विमानन मंत्रालय 24 घंटे कंट्रोल रूम के माध्यम से फ्लाइट ऑपरेशंस, अपडेट्स और किराए की निगरानी कर रहा है।


