भाखड़ा डैम के निर्माण के 71 साल बाद, इसके पीछे स्थित विशाल गोबिंद सागर झील से गाद निकालने की योजना को केंद्र सरकार ने अपनी सहमति दे दी है।केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को अंजाम देने के लिए 10 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम का गठन किया है। इस फैसले का उद्देश्य डैम की जल भंडारण क्षमता को बढ़ाना और भविष्य की चुनौतियों से निपटना है।मंत्रालय द्वारा गठित इस 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के मुख्य इंजीनियर सी.पी. सिंह को भी शामिल किया गया है। यह टीम डैम की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करेगी और गाद निकासी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। यह पहली बार है जब डैम बनने के बाद इतने बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया जाएगा।मुख्य इंजीनियर सी.पी. सिंह ने बताया कि गोबिंद सागर झील में गाद की स्थिति जानने के लिए पिछले दो साल से नियमित रूप से जांच की जा रही थी। इस जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि झील का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा अब पानी की जगह गाद से भर चुका है।डी-सिल्टिंग ना करने से डैम की कुल जल भंडारण क्षमता कम हो रही है, जिसका सीधा असर बिजली उत्पादन और सिंचाई के लिए पानी की सप्लाई पर पड़ सकता है। सी.पी. सिंह ने बताया कि अगर समय रहते डी-सिल्टिंग नहीं की गई, तो भंडारण क्षमता में और कमी आ सकती है। इस समस्या को हल करने के लिए BBMB और केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है।


