Sunday, April 19, 2026

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संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ राज्यसभा नहीं आए; विपक्ष के हंगामे के बाद दोनों सदन 12 बजे तक स्थगित

NRI SANJH JALANDHAR (22 JULY)

संसद के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। सोमवार रात पद से इस्तीफा दे चुके उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ राज्यसभा नहीं पहुंचे। उनकी जगह उपसभापति हरिवंश नरायण सिंह ने सदन की कार्यवाही संभाली। संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यावही शुरू होते ही विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हंगाम शुरू कर दिया। इसके चलते दोनों सदन 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

इसके बाद विपक्षी सांसद संसद के एंट्री गेट के पास पहुंत गए। इसके बाद हाथों में तख्तियां लेकर पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर समेत एसआईआर के खिलाफ नारेबाजी की।

दूसरे दिन की कार्यवाही से पहले संसद भवन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर की बैठक हुई। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा समेत अन्य मंत्री भी शामिल हुए। वहीं, I.N.D.I.A. गठबंधन के नेताओं ने भी मीटिंग की। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात अपने पद इस्तीफा दिया। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को इसकी वजह बताया। धनखड़ सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही में शामिल हुए थे। सभापति के तौर पर उन्होंने स्पीच भी दी थी।

सद में I.N.D.I.A. गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई

सदन की रणनीति तैयार करने के लिए इंडिया ब्लॉक फ्लोर लीडर्स की बैठक संसद में हुई। बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और जयराम रमेश समेत कई लोग शामिल हुए।

21 जुलाई की रात उपराष्ट्रपति धनखड़ ने इस्तीफा दिया

बता दें कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया है। 21 जुलाई को रात 9 से 10 बजे के बीच जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपा। इस अचानक इस्तीफे से राजनीतिक हलचल मच गई है। मानसून सत्र के पहले दिन ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 

पहले दिन राज्यसभा से बिल ऑफ लैडिंग बिल 2025 पास हुआ

मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को चर्चा के बाद राज्यसभा से बिल ऑफ लैडिंग बिल 2025 पास हो गया है। यह बिल 1856 के भारतीय बिल्स ऑफ लैडिंग एक्ट की जगह लेगा। यह बिल लैडिंग (माल पत्र) जारी करने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। दरअसल, जब कोई सामान समुद्र के रास्ते भेजा जाता है, तो उसके साथ एक बिल ऑफ लैडिंग नाम का डॉक्यूमेंट बनता है। यह डॉक्यूमेंट यह पक्का सबूत होता है कि सामान जहाज में लोड कर दिया गया है।

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