Tuesday, April 28, 2026

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कमरों में बंद करके जिंदा जलाया, गोलियों से भूना… नाइजीरिया में बंदूकधारियों का तांडव, 200 लोगों की मौत, कई लापता

NRI SANJH JALANDHAR (15 JUNE)

नाइजीरिया के सेंट्रल बेन्यू स्टेट के येलेवाटा गांव में बंदूकधारियों के हमले में कम से कम 200 लोगों की मौत (200 people died) हो गई है। नाइजीरिया में बंदूकधारियों ने तांडव मचाते हुए 200 से अधिक लोगों को बेडरूम में बंद कर दिया। इसके बाद घर में आग लगा दी। इससे भी मन नहीं भरा तो जिंदा जलते हुए लोगों पर ताबड़तोड़ गोलियों से भून दिया, ताकि भाग न सके। हमले में कई लोगों के लापता होने की भी सूचना है। यह जानकारी एमनेस्टी इंटरनेशनल नाइजीरिया ने दी है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि बेन्यू राज्य में हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और बंदूकधारी पूरी तरह से बेखौफ होकर लोगों की हत्याएं कर रहे हैं। इन हमलों के कारण बड़े पैमाने पर लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और चूंकि ज्यादातर पीड़ित किसान हैं, इसलिए इससे खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल नाइजीरिया ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा कि “नाइजीरियाई अधिकारियों को बेन्यू राज्य में लगभग हर रोज़ होने वाले खून-खराबे को तुरंत रोकना चाहिए और वास्तविक अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना चाहिए।

पोस्ट में आगे कहा गया है कि, “शुक्रवार देर रात से लेकर शनिवार 14 जून 2025 की सुबह तक येलेवाटा पर हमला करने वाले बंदूकधारियों द्वारा 100 से ज़्यादा लोगों की भयावह हत्या से पता चलता है कि सरकार द्वारा राज्य में लागू किए जाने का दावा किए जाने वाले सुरक्षा उपाय काम नहीं कर रहे हैं। कई लोग अभी भी लापता हैं, दर्जनों लोग घायल हैं और उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई परिवारों को उनके बेडरूम में बंद करके जला दिया गया। इतने सारे शव जला दिए गए कि उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी।

पीड़ितों में ज्यादातर किसान

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि इन हमलों के कारण बड़े पैमाने पर लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और चूंकि ज्यादातर पीड़ित किसान हैं। लिहाजा इससे खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।

चरवाहों और किसानों के बीच रहता है तनाव

बेन्यू राज्य नाइजीरिया के मिडिल बेल्ट में स्थित है, जहां मुस्लिम बहुल उत्तर और ईसाई बहुल दक्षिण आपस में मिलते हैं। इस क्षेत्र में चरवाहों और किसानों के बीच जमीन के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से संघर्ष होता रहा है। चरवाहे अपने मवेशियों के लिए चरागाह की तलाश में रहते हैं, जबकि किसान खेती के लिए जमीन चाहते हैं।

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