Tuesday, April 21, 2026

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हरियाणा से किसान खनौरी बॉर्डर के लिए रवाना:डल्लेवाल को छुड़ाने के लिए किसानों की मीटिंग शुरू, शाम को पंजाब सरकार से बैठक संभव

NRI SANJH JALANDHAR (27 NOVEMBER)

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को डिटेन करने के बाद हरियाणा-पंजाब के खनौरी और शंभू बॉर्डर पर किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है। हरियाणा से किसान खनौरी बॉर्डर के लिए रवाना हो गए है। डल्लेवाल की जगह किसान नेता सुखजीत सिंह हरदो झंडे ने मरणव्रत शुरू किया है।

बुधवार को खनौरी बॉर्डर पर मीटिंग हो रही है। यहां डल्लेवाल को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की रणनीति बनाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक शाम को पंजाब सरकार और किसानों की मीटिंग हो सकती है। सरकार की तफ से किसान नेताओं से बातचीत की कोशिश की गई है। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि वह किसी अन्य स्थल पर मीटिंग के लिए नहीं जाएंगे। वह खनौरी में ही मीटिंग करेंगे।

डल्लेवाल को लुधियाना के DMC अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में डल्लेवाल कुछ नहीं खा रहे हैं। उन्होंने सिर्फ पानी और कैंसर की दवा ली है। बुधवार सुबह उनका ब्लड शुगर का लेवल बढ़ गया। डॉक्टरों की टीम जांच करने के लिए आई तो उन्होंने मना कर दिया।

उधर, मंगलवार रात को फरीदकोट से निर्दलीय सांसद सर्बजीत सिंह खालसा उनसे मिलने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। यहां पुलिस अधिकारियों ने उन्हें मिलने नहीं दिया।

वहीं शंभू बॉर्डर पर 4 फुट रास्ता खोलने की तैयारी है, क्योंकि किसानों ने 6 दिसंबर को दिल्ली कूच का ऐलान किया है। किसानों ने मंगलवार को एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें कुछ लोग सीमेंट की बैरिकेडिंग पर हथौड़ा मार रहे हैं। हालांकि, अभी काम रुका हुआ है।

मंगलवार (26 नवंबर) को कांग्रेस नेता एवं पहलवान बजरंग पूनिया भी खनौरी बॉर्डर पर पहुंचे। इसके फोटो भी उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर शेयर किए। ‌

इसके साथ उन्होंने लिखा- किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की गिरफ्तारी के विरोध और किसानों की मांगों के समर्थन में खनौरी बॉर्डर पहुंचकर अपना समर्थन दिया। किसानों के हक की लड़ाई में हमेशा उनके साथ खड़ा ‌रहूंगा।

किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि पंजाब सरकार ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को गिरफ्तार कर किसान विरोधी होने का सबूत दिया है। जिस किसी के साथ भी धक्केशाही होगी, भारतीय किसान यूनियन उसका समर्थन करेगी।

वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा कि डल्लेवाल की गिरफ्तारी को लेकर मुख्यमंत्री से बात नहीं हो पाई है। रवनीत सिंह बिट्‌टू को किसानों और किसानी के संदर्भ में बोलने का अधिकार नहीं है। वह पिछले लंबे समय से किसानी, किसानों के प्रति अपशब्द बोलते आ रहे हैं। वह चुप्पी का दान दें।

DIG बोले- प्रशासन को डल्लेवाल की उम्र-सेहत की चिंता पटियाला रेंज के DIG मनदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि डल्लेवाल ने मरणव्रत की घोषणा की थी। उनकी उम्र और सेहत की वजह से प्रशासन चिंतित था। मरणव्रत के ऐलान के बाद भीड़ हो जाती है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पाती। इसी वजह से प्रशासन ने फैसला किया कि उनकी मेडिकल जांच कराई जाए। इसके लिए उन्हें लुधियाना डीएमसी लेकर आए हैं।

सरकार को 10 दिन का दिया समय जैसे ही सोमवार देर रात किसान नेता डल्लेवाल को उठाया गया तो किसान भड़क गए। किसान नेता सरवन पंधेर ने मीटिंग कर अगली रणनीति बनाई। किसान नेताओं ने कहा है कि इस आंदोलन का यह दूसरा चरण है। उन्होंने केंद्र सरकार को 10 दिन का समय बातचीत के लिए दिया है। अगर इसमें कोई सहमति नहीं बनी तो किसान 6 दिसंबर को दिल्ली की तरफ कूच करेंगे।

किसानों का कहना है कि हमारे सुरक्षा पहरे में कोई कमी रह गई थी, जो पुलिस हमारे किसान नेता को उठाकर ले गई। इस बार उनका सुरक्षा पहरा मजबूत रहेगा। पुलिस मरणव्रत पर बैठे साथी तक नहीं पहुंच पाएगी।

डल्लेवाल ने जमीन परिवार के नाम की डल्लेवाल ने 4 नवंबर को ऐलान किया था कि पार्लियामेंट सेशन शुरू होते ही वह भूख हड़ताल पर बैठेंगे। इसके बाद 6 दिसंबर को किसान दिल्ली कूच करेंगे। 25 नवंबर को फरीदकोट में जगजीत सिंह डल्लेवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि वह सिर पर कफन बांधकर आमरण अनशन पर बैठने जा रहे हैं। केंद्र सरकार को उनकी मांगें पूरी करनी होंगी या फिर वह अपनी जान कुर्बान कर देंगे। उनकी मौत से भी आंदोलन नहीं रुकेगा। मौत के बाद दूसरे नेता आमरण अनशन शुरू करेंगे। इसलिए अपनी जमीन को पुत्र, पुत्रवधू और पौत्र के नाम करवा दिया है, ताकि कोई विवाद न रहे।

बिना ट्रैक्टर-ट्रॉली दिल्ली जाएंगे किसान इधर, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने 18 नवंबर को ऐलान किया था कि किसान 6 दिसंबर को दिल्ली कूच करेंगे। उन्होंने कहा था कि 9 महीने से किसान चुप बैठे हैं, लेकिन सरकारों की ओर से हमारी उपेक्षा की जा रही है। इस कारण दिल्ली जाने का फैसला लिया है।

इस बार किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के बजाय पैदल मार्च करेंगे। इसमें पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के किसान शामिल होंगे​। सरकार के पास 10 दिन का समय है।

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