Sunday, October 11, 2026

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एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच विवाद !

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क और भारत के दिग्गज कारोबारी मुकेश अंबानी के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है. इस बार मस्क ने अंबानी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहकर संबोधित किया है. मस्क का ये बयान भारत में उनकी कंपनी Starlink की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू होने में हो रही देरी को लेकर आया है।एलन मस्क ने ये आरोप लगाया कि अंबानी अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं

और Starlink को भारत में प्रतिस्पर्धा करने का मौका नहीं मिल रहा है. आइये जानते हैं इसपर भारत सरकार की ओर से क्या जवाब आया है और आखिर मुकेश अंबानी पर मस्क की नाराजगी का कारण क्या है।एलन मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, ‘Dear Prime Minister Ambani’

इसके बाद उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें ये समझने में देर हो गई कि भारत में असली ताकत अंबानी के पास है.मस्क ने आगे लिखा कि अंबानी स्वाभाविक रूप से अपने एकाधिकार को बनाए रखना चाहेंगे, लेकिन क्या वो Starlink को भी भारत में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देंगे?पूरा विवाद भारत में Starlink की एंट्री में हो रही देरी की वजह से है. एलन मस्क की कंपनी SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink भारत में कारोबार शुरू करने की तैयारी लंबे समय से कर रही है

कंपनी को जरूरी लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन अभी भी व्यावसायिक स्तर पर सेवा शुरू करने के लिए कुछ और मंजूरियां बाकी हैं.मस्क का कहना है कि Starlink 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस के साथ काम कर रही है और कंपनी ने भारत में नियमों का पालन करने के लिए करीब पांच साल तक प्रयास किए हैं. इसके बावजूद सेवा शुरू करने की अनुमति मिलने में देरी हो रही है।

इससे पहले भी मस्क ने आरोप लगाया था कि कुछ बड़े कारोबारी समूह अपने बाजार पर पकड़ बनाए रखने के लिए Starlink की भारत में एंट्री रोक रहे हैं. हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है।भारत के टेलीकॉम बाजार में मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो एक बड़ा नाम है. जियो की सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी कंपनी जियो सेटकॉम भी इस क्षेत्र में काम करने की तैयारी कर रही है।

. ऐसे में Starlink की एंट्री से सैटेलाइट इंटरनेट के बाजार में कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है. इसके अलावा, भारती समूह की समर्थित यूटेलसैट वनवेब भी इसी फील्ड में हैं. यानी भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी सिर्फ Starlink नहीं, बल्कि दूसरी कंपनियां भी कर रही हैं.मस्क का मानना है कि स्टारलिंक की सेवा उन इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकती है,

जहां अभी कनेक्टिविटी कमजोर है या इंटरनेट की सुविधा नहीं है. इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई और छोटे कारोबारियों को अपने प्रोडक्ट बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।मस्क के आरोपों के बाद भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार को बढ़ावा नहीं दिया जाता है. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस मिल चुका है।

इनमें स्टारलिंक, जियो सेटकॉम और यूटेलसैट वनवेब शामिल हैं.लेकिन लाइसेंस मिलने का मतलब ये नहीं है कि कंपनी तुरंत ग्राहकों को सेवा देना शुरू कर सकती है. व्यावसायिक संचालन के लिए कंपनियों को सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी. इसके अलावा, स्पेक्ट्रम आवंटन और उससे जुड़ी व्यवस्था भी पूरी होनी बाकी हैm

सरकार के मुताबिक, सुरक्षा से जुड़ी जांच तीनों लाइसेंसधारक कंपनियों के लिए चल रही है. इसलिए Starlink को जानबूझकर निशाना बनाने या उसके साथ भेदभाव करने के आरोपों को सरकार ने खारिज किया है।

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