पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा में 2027 की जनगणना के लिए निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों से शिक्षकों की तैनाती के मामले में अंतरिम राहत दे दी है।जस्टिस हरप्रीत सिंह ब्रार की बेंच ने 1 और 7 सितंबर 2026 को निजी, गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों से संबंधित जारी किए गए सरकारी आदेशों को लागू करने पर रोक लगा दी।
इन आदेशों में निजी और सरकारी स्कूलों में जनगणना ड्यूटी के लिए नियुक्त शिक्षकों के विवरण मांगे गए थे। अदालत ने हरियाणा सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2027 को होगी। निजी स्कूलों ने सवाल उठाए थे। यह मामला हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस द्वारा दायर याचिका से संबंधित है।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसने पहले जनगणना ड्यूटी के लिए निजी, गैर-सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षकों की तैनाती के खिलाफ हाईकोर्ट तक पहुंच की थी। उस याचिका को 29 मई 2026 को वापस लेने की अनुमति देकर निपटाया गया था। इसके अलावा अगर शिक्षकों को दोबारा जनगणना ड्यूटी के लिए बुलाया जाता है तो नई याचिका दायर करने की आज़ादी दी गई थी।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जनगणना अधिनियम 1948 और इसके अधीन बनाए गए नियम, निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को गणनाकारों या पर्यवेक्षकों के रूप में तैनात करने के लिए स्पष्ट रूप से अधिकार नहीं देते। अधिनियम की धारा 4A स्थानीय संस्थाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सेवाओं की व्यवस्था करती है,
लेकिन निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल और उनके कर्मचारी इस श्रेणी में नहीं आते।याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि शिक्षकों को अध्यापन से संबंधित कार्यों में शामिल करने का आदेश देने से निजी शैक्षिक संस्थानों के प्रशासन और प्रबंधन की स्वायत्तता प्रभावित होती है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(g) का हवाला दिया गया।
याचिकाकर्ता ने टीएमए पाई फाउंडेशन केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए दलील दी कि निजी गैर-सहायता प्राप्त शैक्षिक संस्थानों को अपने प्रशासन और प्रबंधन में स्वायत्तता प्राप्त है।हरियाणा सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने नोटिस स्वीकार कर लिया और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर कोई जवाब दाखिल किया जाता है, तो इसे अगली सुनवाई से कम से कम सात दिन पहले अदालत की रजिस्ट्री में जमा करवाया जाना चाहिए और याचिकाकर्ता के वकील को एक अग्रिम प्रति प्रदान की जानी चाहिए। अदालत ने इस समय निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों संबंधी संबंधित सरकारी आदेशों पर रोक लगा दी है।


