Thursday, October 1, 2026

Google search engine
Homeपंजाबहाईकोर्ट ने पंजाब न्यायिक सेवा की भर्ती में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों...

हाईकोर्ट ने पंजाब न्यायिक सेवा की भर्ती में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को जनरल श्रेणी में एडजस्ट करने संबंधी फैसला सुनाया

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब न्यायिक सेवा की भर्ती में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को जनरल श्रेणी में एडजस्ट करने संबंधी महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जनरल श्रेणी में चुने गए अंतिम उम्मीदवार से अधिक अंक प्राप्त करता है और उसने आरक्षण का कोई लाभ नहीं लिया है तो उसे आरक्षित कोटे की बजाय जनरल श्रेणी में एडजस्ट किया जाना चाहिए।

अदालत ने इसी आधार पर पिछड़े वर्ग के तीन उम्मीदवारों को सिविल जज (जूनियर डिवीजन)-कम-जुडिशियल मजिस्ट्रेट के पद पर उनकी मेरिट के आधार पर नियुक्ति के लिए विचार करने के आदेश दिए। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने यह फैसला शिवदीप सिंह हंस एवं अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनाया।

याचिकाएं पंजाब लोक सेवा आयोग द्वारा 6 सितंबर, 2022 को जारी भर्ती विज्ञापन से संबंधित थीं।इस भर्ती में सिविल जज (जूनियर डिवीजन)-कम-जुडिशियल मजिस्ट्रेट की कुल 159 पदों का विज्ञापन दिया गया था। इनमें जनरल श्रेणी के लिए 52, पिछड़ी श्रेणियों के लिए 15 और पिछड़ी श्रेणियों के पूर्व सैनिक एल.डी.ई.एस.एम. के लिए तीन पद शामिल थे।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पिछड़ी श्रेणियों की चयन सूची में शामिल चार उम्मीदवारों को जनरल श्रेणी में एडजस्ट किया जाए। इन उम्मीदवारों में दिव्यानी लूथरा ने 562, डाफिन गोत्रा ने 561.63, योगिता ने 560.88 और मनमीत कौर ने 556.63 अंक हासिल किए थे। जनरल श्रेणी में अंतिम चुने गए उम्मीदवार मानव गर्ग के 554 अंक थे। याचिकाकर्ताओं के अनुसार इन चार उम्मीदवारों को

जनरल श्रेणी में एडजस्ट करने पर पिछड़ी श्रेणियों की सीटें मेरिट में उनसे बाद आने वाले उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध हो सकती थीं। हाईकोर्ट ने देखा कि इन चार उम्मीदवारों के जनरल श्रेणी के अंतिम चुने गए उम्मीदवार से अधिक अंक होने और उनके द्वारा आरक्षण का लाभ न लेने की स्थिति निर्विवाद है।अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को जनरल श्रेणी में एडजस्ट किया जाना चाहिए।

हालांकि अदालत ने पहले से नियुक्त उम्मीदवारों को हटाने का आदेश नहीं दिया। अदालत ने पाया कि निजी प्रतिवादियों की नियुक्ति मार्च 2024 में जनरल श्रेणी में हुई थी और अप्रैल 2024 में उनकी पद पर तैनाती की गई थी। वे प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं और दो साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। अदालत ने उपलब्ध खाली पदों को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता अपनाया, जिससे याचिकाकर्ताओं को उनकी मेरिट का लाभ मिल सके

और पहले से काम कर रहे उम्मीदवारों की नियुक्ति भी प्रभावित न हो। अदालत ने शिवदीप सिंह हंस, बलवीर कौर व शरणप्रीत कौर को पिछड़ा वर्ग की मेरिट के आधार पर सिविल जज (जूनियर डिवीजन)-कम-जुडिशियल मजिस्ट्रेट के पद पर नियुक्ति के लिए विचार करने का निर्देश दिया। उन्हें मेरिट के आधार पर वरिष्ठता का लाभ मिलेगा।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments