भारत और अमेरिका के संबंधों में उतार-चढ़ाव जारी है. अब अमेरिका ने दावा करते हुए कहा कि भारत समेत 40 से ज्यादा देश चीन के कथित शैडो ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो उसको ट्रंप के टैरिफ से बचाने में मदद कर रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि इस नेटवर्क के जरिए चीन अमेरिकी भारी शुल्क से बचने के लिए दूसरे देशों के रास्ते अपने सामान को अमेरिकी बाजार तक पहुंचा रहा है।
ट्रंप प्रशासन के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने इस मामले में एक रिपोर्ट जारी की है. साथ ही अमेरिका ने ऐसे मामलों की पहचान करने और कार्रवाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम इस्तेमाल करने की योजना भी बताई।अमेरिकी रिपोर्ट में भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई उत्पादन क्षेत्र का भी जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक यह क्षेत्र पंप और कंप्रेसर जैसे उत्पादों को अपने उत्पादन और आपूर्ति नेटवर्क में शामिल करता है, जिसका असर अमेरिका के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस में औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है.नवारो ने रिपोर्ट में कहा कि एक चीनी पंप जो पुणे से भारतीय पंप के रूप में निकलता है, वह ऐसा पंप है जिसे सिनसिनाटी, डेटन या कोलंबस में मशीनिंग नहीं किया गया।
रिपोर्ट में अवैध तरीके से दूसरे देशों के जरिए भेजे जाने वाले सामान की सालाना कीमत करीब 40 अरब डॉलर से 303 अरब डॉलर के बीच बताई गई है. नवारो ने बताया कि अमेरिका अब ऐसे सामान की पहचान के लिए AI आधारित डिटेक्टिव बॉर्डर सिस्टम का इस्तेमाल करेगा. यह सिस्टम अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) की मदद करेगा
रिपोर्ट के मुताबिक इस सिस्टम में शिपमेंट से जुड़ा डेटा, सामान के रूट का इतिहास, उत्पादों का वर्गीकरण, कंपनियों और मालिकाना संबंधों की जानकारी, उत्पादन क्षमता से जुड़े संकेतक, असामान्य गतिविधियों की पहचान और कंप्यूटर विजन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।


