वीर सावरकर के अपमान से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की निचली अदालत से राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन को निरस्त कर दिया है. कोर्ट ने यह आदेश तब दिया जब उत्तर प्रदेश सरकार ने यह बताया कि उसने राहुल के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी मंजूरी नहीं दी थी।
मामला लखनऊ के रहने वाले वकील नृपेंद्र पांडे की ओर से दायर किया गया था. याचिका में राहुल गांधी पर आईपीसी की धारा 153A और 505 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी. आरोप था कि 17 दिसंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने वीर सावरकर को अंग्रेजों का नौकर और पेंशन लेने वाला बताया था.शिकायतकर्ता का आरोप था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले से तैयार पर्चे पत्रकारों को बांटे गए थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि बयान पूरी तैयारी के साथ दिया गया
और इसका उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना थालखनऊ की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने इस मामले में राहुल गांधी को समन जारी किया था. इसके खिलाफ राहुल इलाहाबाद हाई कोर्ट गए, लेकिन 4 अप्रैल, 2025 को हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने समन निरस्त करने से मना कर दिया.इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को उनके गैरजिम्मेदाराना बयान के लिए कड़ी फटकार लगाई, लेकिन उन्हें अंतरिम राहत देते हुए ACJM कोर्ट से जारी समन पर रोक लगा दी. अब यूपी सरकार के जवाब के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने समन को ही रद्द कर दिया है.25 अप्रैल 2025 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने राहुल गांधी को सावरकर पर दिए बयान को लेकर फटकार लगाई थी.
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा था कि राहुल गांधी को स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए.कोर्ट ने यह भी कहा था कि राहुल की दादी ने सावरकर की प्रशंसा करते हुए पत्र लिखा था. इसी दौरान महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश वायसराय को लिखे पत्र में खुद को ‘आपका निष्ठावान सेवक’ कहने का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने सवाल किया था कि क्या इसके आधार पर कोई उन्हें भी अंग्रेजों का नौकर कह सकता है.


