दिल्ली वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने नियमों का उल्लंघन करने पर छह थर्मल प्लांटों पर 61.85 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। पंजाब में तलवंडी साबो और गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांटों पर भी जुर्माना लगाया गया। हरियाणा के तीन और पंजाब के दो थर्मल प्लांटों पर भी जुर्माना लगा। दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्लांटों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह कोयला-आधारित थर्मल पावर प्लांटों पर लगभग 61 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय हर्जाना लगाया है। इन प्लांटों पर यह कार्रवाई कोयले के साथ फसल के अवशेषों से बने बायोमास पेलेट्स को मिलाकर (को-फायरिंग) इस्तेमाल करने में नाकाम रहने के कारण की गई है।
जिन छह प्लांटों पर जुर्माना लगा है, उनमें से तीन हरियाणा में, दो पंजाब में और एक उत्तर प्रदेश में स्थित है। आयोग ने इन प्लांटों को 15 अप्रैल तक हर्जाने की रकम जमा करने का निर्देश दिया है। CAQM ने बताया कि यह कार्रवाई उन नियमों के तहत की गई है, जिनके अनुसार सभी कोयला-आधारित थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयले के साथ 5% बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट्स का मिश्रण इस्तेमाल करना अनिवार्य है।
पर्यावरणीय हर्जाने से बचने के लिए वर्ष 2024-25 के लिए को-फायरिंग की न्यूनतम सीमा 3% निर्धारित की गई है। यह आदेश फसल के अवशेषों के प्रबंधन की ‘एक्स-सीटू’ (खेत से बाहर) रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पड़ोसी राज्यों में, विशेष रूप से सर्दियों में धान की कटाई के बाद, पराली जलाने की घटनाओं को कम करना है।
सर्दियों में प्रदूषण के चरम पर होने के दौरान, यह पराली दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। किसान अक्सर कटाई और बुवाई के चक्र के बीच खेतों को जल्दी साफ करने के लिए पराली जला देते हैं। बिजली उत्पादन में कृषि अपशिष्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर, यह नीति किसानों को अपशिष्ट निपटान का एक टिकाऊ तरीका उपलब्ध कराने के साथ-साथ कोयले पर निर्भरता कम करने का भी प्रयास करती है।


