रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पुष्टि की है कि अमेरिका के अधिकारी अगले हफ्ते मॉस्को का दौरा करेंग। यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले हफ्ते पेश किए गए 28-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर बातचीत के लिए होगा। पुतिन ने यह जानकारी किर्गिस्तान की तीन दिवसीय यात्रा के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान दी।
पुतिन ने कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किया गया शांति प्रस्ताव बातचीत का आधार बन सकता है।उन्होंने कहा-‘हम इस प्रस्ताव के हर बिंदु पर विस्तृत बातचीत के लिए तैयार हैं.’ हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि यूक्रेन को पहले उन इलाकों से अपनी सेना हटानी होगी जिन पर रूस अपना दावा करता है। पुतिन ने चेतावनी दी कि अगर यूक्रेन सेना पीछे नहीं हटती, तो रूस हथियारों के दम पर ऐसा करेगा।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पुतिन के बयान को खारिज करते हुए कहा कि शांति रूस की धमकियों या चेतावनियों से तय नहीं होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शर्तों पर होगी। जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा- ‘हम अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ मिलकर जिनेवा में बने शांति बिंदुओं को आगे बढ़ा रहे हैं और सुरक्षा की दिशा में काम कर रहे है।
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ अगले सप्ताह मॉस्को पहुंचेंगे, जबकि यूएस आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल जल्द कीव जाने की तैयारी में है।हाल ही में लीक हुए एक ऑडियो में दावा किया गया था कि विटकॉफ रूस को यह सलाह दे रहे थे कि वे ट्रंप को प्रभावित करने के लिए किस तरह बातचीत करें। इस पर पुतिन ने टिप्पणी करते हुए हल्के अंदाज में कहा कि विटकॉफ समझदार व्यक्ति लगते है। उन्हें संवाद के लिए माहौल बनाना होता है।
यूरोप में बेचैनी, वार्ता में शामिल होने की कोशिशरूस-यूक्रेन जंग की वजह से यूरोपीय देशों की सुरक्षा खतरे में मानी जा रही है। इसी कारण अब कई यूरोपीय नेता भी इस वार्ता में शामिल होने की कोशिश कर रहे है ताकि शांति प्रक्रिया में उनकी भूमिका तय हो सके। पुतिन ने दावा किया कि रूस न तो नाटो पर हमला करेगा और न ही यूरोप पर। उन्होंने ऐसे सभी आरोपों को झूठ बताया। हालांकि, उन्होंने फिर दोहराया कि यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं होना चाहिए और उसके इलाके में पश्चिमी सैन्य ठिकाने नही होने चाहिए।


