केंद्र सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट और सिंडिकेट भंग करने के अपने फैसले को वापस लेते हुए नोटिफिकेशन रद्द कर दिया है। छात्र संघ और कई नेताओं ने कई दिनों से इस फैसले का विरोध कर रहे थे, जिसके कारण यह फैसला लिया गया।इस बीच, आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन वापस लेने के फैसले पर निशाना साधा है।
मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि सरकार के फैसले का छात्रों और आम लोगों दोनों तरफ से विरोध किया जा रहा था, जिसके बाद सरकार को आखिरकार जनता के आगे झुकना पड़ा।जिक्र कर दें कि पंजाब सरकार ने आज ऐलान किया कि वह जल्द ही हाई कोर्ट जाएगी।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया कि पंजाब सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ की सीनेट और सिंडिकेट को गैर-संवैधानिक तौर पर भंग करने और नोटिफिकेशन जारी करने के खिलाफ हाई कोर्ट जाएगी।
हालांकि, ताजा अपडेट के अनुसार, केंद्र सरकार ने 5 नवंबर 2025 को ही 28 अक्टूबर 2025 के उस विवादास्पद नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सीनेट और सिंडिकेट का पुनर्गठन प्रस्तावित था। यह कदम छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बाद उठाया गया है। पंजाब सरकार अब भी इस मुद्दे पर अदालती कार्रवाई की योजना बना रही है, लेकिन नोटिफिकेशन रद्द होने से स्थिति में कुछ राहत मिली है।


