Friday, April 17, 2026

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मुंबई बोट हादसा: फेरी बोट डूबने से 13 की मौत, 2 लापता, FIR दर्ज, प्रत्यक्षदर्शियों ने किए दिल दहला देने वाले खुलासे

NRI SANJH JALANDHAR (19 DECEMBER)

मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया के पास बुधवार(18 दिसंबर) को हुई दर्दनाक घटना ने देश को झकझोर दिया है। नेवी की स्पीड बोट ने नीलकमल नामक यात्री फेरी को टक्कर मार दी। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। जबकि 101 लोगों को बचा लिया गया। दो लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस मामले में अब नेवी स्पीड बोट के ड्राइवर समेत दूसरे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।प्रत्यक्षदर्शियों ने इस हादसे को लेकर दिल दहला देने वाले खुलासे किए हैं।

हादसे के बाद नेवी पर उठ रहे सवाल
फेरी बोट में सवार लोगों ने बताया है कि हादसे से पहले नेवी बोट स्टंट कर रहा था। अचानक ही नेवी बोट फेरी बोट से टकरा गया और हादसा हो गया। हादसे और रेस्क्यू के वीडियो भी सामने आए हैं। इस हादसे को लेकर नेवी पर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां पर फेरी बोट टूरिस्ट्स को सर्विस देती है, उस एरिया में आखिरी नेवी के बोट की इंजन टेस्टिंग क्यों हो रही थी?

मृतकों के लिए मुआवजे का ऐलान
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीड़ितों के परिजनों को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और रेस्क्यू ऑपरेशन की तारीफ की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बोट हादसे पर दुख जताया। पीएम मोदी ने भी मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की मदद का ऐलान किया है।

यहां देखें कैसे हुए हादसा:

हादसे के बाद तुरंत शुरू कर दिया गया रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना बुधवार शाम करीब 4 बजे हुई। नेवी की स्पीड बोट इंजन टेस्टिंग के दौरान नियंत्रण खो बैठी। यह बोट करंजा के पास यात्री फेरी नीलकमल से टकरा गई। फेरी बोट  टूरिस्ट्स को गेटवे ऑफ इंडिया से एलिफेंटा द्वीप लेकर जा रही थी। टक्कर इतनी तेज थी कि फेरी बोट का एक हिस्सा टूट गया। फेरी बोट में पानी भरने लगा। यह पलटने लगी। नेवी, कोस्ट गार्ड और मरीन पुलिस ने तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया। चार हेलीकॉप्टर, 11 नेवी शिप और तीन मरीन बोट की मदद ली गई। 101 लोगों को बचा लिया गया लेकिन 13 लोगों की जान चली गई।

हादसे में 13 लोगों के मरने की पुष्टि
फेरी बोट हादसे में 13 लोगों के मरने की पुष्टि की गई है। इनमें सात पुरुष, चार महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। इनमें से 10 लोगों की पहचान देर रात पुलिस द्वारा की गई। अन्य 3 मृतकों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां पहचान की प्रक्रिया पूरी करने में जुटी हैं। मृतकों में से तीन नेवी बोट पर सवार थे। वहीं बाकी फेरी बोट पर सवार थे

इन 10 लोगों की पहचान की गई है: 

  1. महेंद्र सिंह शेखावत (नौसेना कर्मी)
  2. प्रवीण शर्मा (एनएडी नाव पर कर्मी)
  3. मंगेश (एनएडी नाव पर कर्मी)
  4. मोहम्मद रेहान कुरैशी (यात्री, नाव)
  5. राकेश नानाजी अहिरे (यात्री, नाव)
  6. सफियाना पठान (यात्री, नाव)
  7. माही पावरा (उम्र 3, यात्री, नाव)
  8. अक्षता राकेश अहिरे (यात्री, नाव)
  9. मिठू राकेश अहिरे (उम्र 8, यात्री, नाव)
  10. दीपक वी. (यात्री, नाव)

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया: 
पहला प्रत्यक्षदर्शी: नीलकमल नाव पर सवार 45 वर्षीय गणेश ने बताया कि ‘नेवी की स्पीड बोट पूरी रफ्तार से हमारे फेरी बोट के चारों ओर चक्कर लगा रही थी। नेवी बोट समुद्र में स्टंट कर रहा था।मुझे लगा कि बोट टकरा सकती है और कुछ ही सेकंड में हादसा हो गया। पानी अंदर आने लगा और नाव पलटने लगी। मैंने लाइफ जैकेट पहनी और समुद्र में कूद गया। 15 मिनट तक तैरने के बाद रेस्क्यू टीम ने मुझे बचा लिया।’

दूसरा प्रत्यक्षदर्शी: बेंगलुरु के एक दूसरे यात्री विनायक मथम ने बताया कि ‘नीलकमल फेरी बाेट में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा था। फेरी बोट में पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट नहीं थीं। हमें चढ़ते समय जैकेट पहनाई जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। नेवी की बोट के क्रू हादसे से पहले मौज-मस्ती करते नजर आ रहे थे। स्पीड बोड समुद्र में अलग अलग ढंग से करतब करती नजर आ रही थी।’

मामले में दर्ज हुई FIR
हादसे के तुरंत बाद मुंबई के कोलाबा पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई। यह शिकायत 22 साल के नाथाराम चौधरी ने दर्ज कराई। नाथराम चौधरी नीलकमल फेरी बोट पर सवार थे। एफआईआर में नेवी बोट के ड्राइवर और दूसरे जिम्मेदार लोगों को नामजद किया गया है। घटना पर फेरी बोट हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों ने नाराजगी जाहिर की है।

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