ध्रुव के पिता ने करग‍िल में द‍िखाया दम, बेटा टेस्ट मैच में दिखाएगा

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NRI SANJH JALANDHAR(13 JANUARY)

ध्रुव जुरेल के पिता नेम सिंह जुरेल कारगिल युद्ध में दमखम दिखा चुके हैं। ध्रुव अपने पिता नेम सिंह की तरह सेना में जाना बीवी चाहते थे। आर्मी स्कूल में पढ़ने के दौरान ध्रुव ने स्व‍िम‍िंग सीखी. इसके बाद गली क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उन्हें क्रिकेट से प्यार हो गया. एक इंटरव्यू में ध्रुव ये बात मान चुके हैं कि वो पढ़ाई में मेधावी नहीं थे, उन्हें क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था।

ध्रुव ने एक अन्य इंटरव्यू में यह भी माना कि उनके प‍िता कभी इस बात का सपोर्ट नहीं करते थे मैं क्रिकेट खेलूं. जुरेल ने कहा कि एक दिन उनके पिता अखबार पढ़ रहे था और अचानक उनसे कहा एक क्रिकेटर है जिसका नाम भी तुम्हारे जैसा है, उसने खूब सारे रन बनाए हैं। उस दिन ध्रुव डर गए थे, और उन्होंने पिता को यह नहीं बताया कि वो क्रिकेटर मैं हूं, ध्रुव बस डर रहे थे कि कहीं उनके प‍िता क्रिकेट छोड़ने के लिए ना कह दे।

ध्रुव की मां ने बेची ज्वेलरी, 1500 का बैट भी लगता था महंगा
जुरेल ने उस इंटरव्यू में बताया कि इसके बाद उन्हें यह अहसास हो गया कि क्रिकेट में ही उनका फ्यूचर है, उन्हें 14 साल की उम्र में एक किट चाहिए थी, पर तब पिता ने उन्हें अपनी पढ़ाई पर फोकस करने के लिए कहा। तब उनकी मां ने अपने बेटे की इच्छा पूरी करने के लिए सोने की चेन बेच दी। जुरेल ने तब यह भी बताया था कि उनको कश्मीर विलो का बैट खरीदना था, जो तब लगभग 1500-2000 रुपए का था, यह भी उनके लिए महंगा था, पर पिता ने बैट खरीद लिया. लेकिन जब पूरे किटबैग की बात आई, तो वो रेंज से बाहर हो गई।

जब ध्रुव ने खुद को बाथरूम में बंद किया
इसके बाद ध्रुव ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया और घरवालों को धमकी दी कि अगर उन्होंने क्रिकेट किट नहीं दिलवाई तो वो भाग जाएंगे, इससे मेरी मां भावुक हो गईं और उन्होंने अपनी सोने की चेन मेरे पिता को दे दी और उनसे कहा कि इसे बेचकर इसको किट दिलवा दो. तब वो बहुत खुश हो गए थे, हालांकि बड़ा होने पर जुरेल को अहसास हुआ कि उनका बलिदान कितना बड़ा था। इस इंटरव्यू में उन्होंने माना कि पापा को ब्लैकमेल करने का उन्हें पछतावा हुआ था।

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