Friday, May 15, 2026

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्‍स बैठक में मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रेट में ऊर्जा की सप्लाई पर चिंता जतायी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्‍स विदेश मंत्रियों की बैठक सत्र को संबोधित करते हुए संगठन के 20 वर्षों के सफर, उपलब्धियों और भविष्य को लेकर बात की. इस दौरान ईरान और यूएई की मौजूदगी में भारत ने मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रेट में ऊर्जा की सप्लाई और समुद्री स्थिरता पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए अपना स्टैंड साफ कर दिया।

ब्रिक्स देशों खासकर ईरान और यूएई से भारत ने अपील की है कि वह मिलकर ऐसी योजना बनाएं, जिससे मिडिल ईस्ट संकट के चलते दुनिया में मची उथल-पुथल और कुछ देशों के एकतरफा प्रतिबंधों से बचा जा सके। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा मौजूदा समय में दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक हालात अच्छे नहीं हैं. हमें ऐसा रास्ता खोजना होगा, जिससे हमारे देशों पर बुरा असर न पड़े।जयशंकर ने जोर देकर कहा कि, ‘स्थिरता को आप अपनी पसंद से चुन नहीं सकते और न ही शांति टुकड़ों में मिल सकती है।

ब्रिक्स देशों खासकर ईरान और यूएई से भारत ने अपील की है कि वह मिलकर ऐसी योजना बनाएं, जिससे मिडिल ईस्ट संकट के चलते दुनिया में मची उथल-पुथल और कुछ देशों के एकतरफा प्रतिबंधों से बचा जा सके। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा मौजूदा समय में दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक हालात अच्छे नहीं हैं।हमें ऐसा रास्ता खोजना होगा, जिससे हमारे देशों पर बुरा असर न पड़े. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि, ‘स्थिरता को आप अपनी पसंद से चुन नहीं सकते और न ही शांति टुकड़ों में मिल सकती है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘होर्मुज स्ट्रेट लेकर दुनिया के अहम जलमार्गों के जरिए सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के आवाजाही होना वैश्विक आर्थिक समृद्धि के लिए बेहद जरूरी है.’ उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि ‘संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आधार होना चाहिए.’ आगे कहा कि ‘बातचीत और कूटनीति’ ही तनाव को खत्म करने का एक मात्र स्थायी समाधान है।’

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत तनाव को खत्म करने को लेकर किए जा रहे प्रयासों को समर्थन देने के लिए तैयार है।एस. जयशंकर ने कहा क‍ि पिछले 20 वर्षों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए हम आज अपने सहयोग की प्रकृति और उसके भविष्य की दिशा पर चर्चा कर रहे हैं. पार्टनर देशों की मौजूदगी ने हमारे सामूहिक प्रयासों को और मजबूत किया है और आपसी जुड़ाव को गहरा किया है। अपनी सामूहिक ताकत का इस्तेमाल करके हम ब्रिक्‍स को और ज्यादा मजबूत तेज और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक ढलने वाला बना सकते है।

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