पिछले 13 सालों से ज़िंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हरीश राणा को आज अतिंम विदाई दी गई हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छित मौत) की इजाज़त मिली थी जिसके बाद वह आज पंचतत्व में विलीन हो गए। हरीश 2013 में हॉस्टल के चौथे फ्लोर से नीचे गिरने के बाद कोमा में चले गए थे और तब से लगातार लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे।
हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने बेटे के अंग दान करने का फैसला लिया है। 13 साल तक अपने बेटे को बिस्तर पर लाचार देखने वाले परिवार का यह फैसला समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरा है। 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दी थी. परिवार ने वर्षों तक हर संभव इलाज कराया, उम्मीदें बांधे रखीं, लेकिन जब कोई सुधार नहीं दिखा, तब उन्होंने यह कठिन रास्ता चुना।


