पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के दौरान भारत का दूसरा एलपीजी जहाज ‘नंदा देवी’ मंगलवार को वाडीनार बंदरगाह सुरक्षित पहुंच गया। एक अधिकारी ने बताया कि यह जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करके 46,500 मीट्रिक टन गैस लेकर आया है। इससे पहले पहला जहाज ‘शिवालिक’ सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। दींदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह ने बताया कि ‘नंदा देवी’ जहाज देवभूमि द्वारका जिले के वाडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है। एलपीजी (तरल पेट्रोलियम गैस) को सहायक जहाज में ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही है।
सिंह ने कहा कि वाडीनार बंदरगाह अथॉरिटी को बंदरगाह मंत्रालय के निर्देश के अनुसार कामों को अधिकतम कुशलता से पूरा करना है। मौजूदा निर्देशों के तहत आने वाले सभी एलपीजी जहाजों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि उनके ट्रांसफर और उतार की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो सके। उन्होंने कहा कि सारे संचालन मापदंडों की सख्त निगरानी की जा रही है और इस प्रक्रिया में कई एजेंसियां शामिल हैं। सिंह ने बताया, “हमने जहाज का दौरा किया और चालक दल के साथ मुलाकात की।
‘डॉटर वेसल’ रास्ते में है। उसके पहुंचते ही वह ‘मदर वेसल’ नंदा देवी के साथ लग जाएगा और जहाज से जहाज ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।” उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि भविष्य में आने वाले सभी एलपीजी जहाजों को भी प्राथमिकता के आधार पर संभाला जाए और सभी सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालन किया जाए। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है।
इनमें से अधिकांश ईंधन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले तथा तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मार्ग प्रभावित हो गया है। मौजूदा समय में 22 भारतीय झंडे वाले जहाज फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए कोशिशें जारी हैं। इन जहाजों पर 611 मल्लाह सवार है।


