Thursday, February 5, 2026
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“लुधियाना के कमिश्नर ऑफ पुलिस को अदालत में बुलाने की आखिर जरूरत क्या है – हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को बिना ठोस कारण सीनियर पुलिस अधिकारियों को डिफेंस गवाह के तौर पर समन जारी करने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाते हुए, जालंधर अदालत द्वारा एनडीपीएस केस में लुधियाना के कमिश्नर ऑफ पुलिस स्वप्न शर्मा को समन देने के आदेश पर स्टे लगा दिया।

यह मामला माननीय जस्टिस जसजीत सिंह बेदी द्वारा सुना गया। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी पैदा करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को बेवजह अदालतों में घसीटना न्यायिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल है, जो कि खासकर समयबद्ध एनडीपीएस ट्रायलों में बिल्कुल मान्य नहीं।

सुनवाई के दौरान बेंच ने खुली अदालत में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “लुधियाना के कमिश्नर ऑफ पुलिस को अदालत में बुलाने की आखिर जरूरत क्या है? क्या सिर्फ सी.सी.टी.वी. रिकॉर्ड हासिल करने के लिए?” बेंच ने इस बात पर भी गंभीर हैरानी जताई कि जालंधर की ट्रायल कोर्ट द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की हाजिरी के लिए जमानती वारंट तक जारी कर दिए गए।

जब डिफेंस पक्ष द्वारा कोई वाजिब कारण पेश न किया जा सका तो हाई कोर्ट ने कहा कि जो अधिकारी न तो जांच का हिस्सा रहे हैं और न ही गवाहों की सूची में शामिल हैं, उन्हें सिर्फ प्रसिद्धि हासिल करने या ट्रायल लटकाने के लिए समन नहीं किया जा सकता।हाई कोर्ट ने यह भी दर्शाया कि सी.पी. लुधियाना द्वारा कानून-व्यवस्था और अन्य गंभीर जिम्मेदारियों के मद्देनजर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की विनती की गई थी,

जिस पर जालंधर अदालत को गंभीरता से विचार करना चाहिए था। इसकी बजाय हाजिरी पर जोर देना न्यायिक समझदारी के अनुकूल नहीं है। हाई कोर्ट ने समनिंग आदेश के बाद हुई मीडिया कवरेज पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधूरी जानकारी और अटकलों पर आधारित रिपोर्टिंग के माध्यम से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अक्स को खराब करने की कोशिश की गई, जो मीडिया की पारदर्शिता और समाज के भरोसे के लिए घातक है।

मौजूदा एनडीपीएस केस एक सफल और साफ-सुथरी एंटी-ड्रग कार्रवाई से संबंधित है। मार्च 2024 में जालंधर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा दो महीने लंबी कार्रवाई के बाद एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया गया था। इस दौरान 9 आरोपी गिरफ्तार किए गए, 22 किलोग्राम अफीम बरामद हुई और नशे की कमाई से जुड़े लगभग 9 करोड़ के लेन-देन वाले 30 बैंक खाते जब्त किए गए।

इस कार्रवाई के दौरान झारखंड से अफीम उगाने वाले अभि राम की गिरफ्तारी हुई, जबकि कूरियर नेटवर्क, हवाला ऑपरेटरों और विचौलियों की भूमिका भी सामने आई। जांच के दौरान छह कस्टम अधिकारीयों से जुड़े गंभीर तथ्य भी बेनकाब हुए, जिसमें दिल्ली से चार कस्टम कर्मचारियों की गिरफ्तारी शामिल है।हाई कोर्ट ने कहा कि मुल्जिमों की गिरफ्तारी, बरामदगियों और पूरी सप्लाई चेन के भंग होने से स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को समन देने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं।

इन तथ्यों के मद्देनजर, हाई कोर्ट ने जालंधर अदालत के समनिंग आदेश पर स्टे लगाते हुए सीपी लुधियाना को तुरंत राहत दी और यह स्पष्ट संदेश दिया कि न्यायिक प्रक्रिया को न तो वरिष्ठ अधिकारियों को परेशान करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और न ही प्रभावशाली एंटी-ड्रग कार्रवाइयों को कमजोर करने के लिए।

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