मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कोर्ट में लंबित मामलों पर हो रही टिप्पणियों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान जज की टिप्पणियों को लेकर लोग नैरेटिव बनाना शुरू कर देते हैं, लेकिन वह बहुत मजबूत आदमी हैं, वह सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होते है।
उन्होंने पूर्व सांसद प्रज्जवल रेवन्ना की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। रेवन्ना ने उनके खिलाफ रेप केस के ट्रायल्स को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था।प्रज्जवल रेवन्ना के वकीलों सिद्धार्थ लूथरा और सिद्धार्थ दवे ने ट्रायल्स के दौरान जजों की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वकीलों के खिलाफ भी कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं, जिन्हें रिकॉर्ड से हटाना जरूरी है।
उन्होंने जजों की टिप्पणियों को पक्षपात का आधार बनाते हुए ट्रायल्स के ट्रांसफर का अनुरोध किया।सीजेआई के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी सुनवाई कर रहे थे। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि जज की टिप्पणियां पक्षपात का आधार नहीं हो सकती है। बेंच ने कहा, ‘हमारे पास इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि जज इस तथ्य से प्रभावित नहीं होंगे कि याचिकाकर्ता को पहले मामले में दोषी पाया गया था
वह अपने निष्कर्ष मौजूदा मुकदमे में पेश किए गए सबूतों के आधार पर ही देंगे।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक सवाल दोनों पक्षों की ताकत जांचने के लिए किए जाते है, वह कोर्ट के अंतिम मत को नहीं दर्शाता है।
हालांकि, लोग इस बात को समझे बगैर नतीजे पर पहुंच जाते हैं और कार्यवाही के दौरान पूछे गए सवालों के आधार पर नैरेटिव बनाने लगते है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘लेकिन मैं इस सबसे प्रभावित नहीं होता हूं… सोशल मीडिया या कैसे भी। अगर किसी को ऐसा लगता है कि वह मुझे डरा-धमका सकते हैं तो वे गलत है। मैं बहुत मजबूत आदमी हूं।”


