NRI SANJH JALANDHAR (24 OCTOBER)
पंथक संकट से घिरी शिरोमणि अकाली दल (SAD) चार सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ेगी। यह फैसल बुधवार को पार्टी की कार्यसमिति और जिला प्रधानों की बैठक में लिया गया है। करीब दो घंटे चली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई।
चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं, जिनमें बर्नाला, डेरा बाबा नानक, गिदड़बाहा और चब्बेवाल शामिल हैं। लेकिन जब से अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल को तंखाहिया घोषित किया गया है, तब से वह पार्टी की गतिविधियों से दूर रहे हैं।
अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा है कि तंखाहिया तब तक तंखाहिया रहता है जब तक उसकी सजा पूरी नहीं हो जाती। उनकी सजा पर फैसला दिवाली के बाद लिया जाएगा।
जिसके बाद पार्टी ने चुनाव न लड़ने का फैसला किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने प्रेस कांफ्रेंस कर यह जानकारी दी है। हालांकि पार्टी एसजीपीसी के प्रधान पद के लिए होने वाले चुनाव में हिस्सा लेगी।
उन्होंने कहा कि हम हमेशा श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का पालन करते हैं। 30 अगस्त को प्रधान तनखैया घोषित किए गए। 31 तारीख को वह अकाल तख्त साहिब में पेश हुए। लेकिन काफी समय बीत चुका था। कई बार सिंह साहिब से फैसला देने का आग्रह किया गया।
लेकिन अब चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव है। लोग चाहते थे कि प्रधान सुखबीर बादल गिद्दड़बाहा हलके से चुनाव लड़ें। लेकिन कल जैसे ही जत्थेदार साहब का आदेश आया, यह साफ हो गया कि वह प्रचार नहीं कर सकते। पूरी पार्टी ने फैसला किया है कि हम श्री अकाल तख्त साहिब के फैसले से आगे नहीं जाएंगे। इस दौरान मैंने चुनाव से बाहर रहने का फैसला किया है।
चुनाव न लड़ने का फैसला सर्वसम्मति से हुआ पास
इससे पहले मीटिंग की अध्यक्षता कार्यकारी अध्यक्ष बलविंदर सिंह भूंदड़ ने की। जिसमें हर मेंबर से राय ली गई। वहीं, चुनाव लड़ने का प्रस्ताव पास किया। यह फैसला उस समय लिया गया है जब पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को श्री अकाल तख्त साहिब ने तनखैया घोषित कर रखा है।
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने पहले ही साफ कर चुके हैं कि तनखैया तब तक तनखैया ही रहता है, जब तक उसकी तनखा पूरा नहीं हो जाती है। उसकी सजा के बारे में फैसला दिवाली के बाद लिया जाएगा।
ऐसे में साफ है कि सुखबीर बादल चुनाव प्रचार नहीं कर सकते हैं और न ही चुनाव लड़ सकते हैं। मीटिंग से पहले अकाली नेता विरनजीत सिंह गोल्डी का कहना है कि अगर सुखबीर सिंह बादल को प्रचार का हक नहीं होगा। तो हम इलाके में कैसे जाएंगे। ऐसे में मैं तो यहीं कहूंगा कि इस स्थिति में चुनाव में नहीं जाना चाहिए।
अकाली दल की मांग :
इससे पहले मंगलवार शाम को शिरोमणि अकाली दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने अकाल तख्त के साथ मुलाकात की और मांग की कि सुखबीर बादल की सजा पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाए, क्योंकि अब चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। इन सीटों में बर्नाला, डेरा बाबा नानक, गिदड़बाहा और चब्बेवाल शामिल हैं। लेकिन जब से सुखबीर बादल को तंखाहिया घोषित किया गया है, तब से वह पार्टी की गतिविधियों से दूर रहे हैं। अब नामांकन प्रक्रिया पूरी होने में बस एक दिन बचा है। ऐसे में पार्टी चुनाव कैसे लड़ेगी, इस पर पूरी रणनीति तैयार की जा रही है। फैसला सभी की सहमति से लिया जाएगा। हालांकि, चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर दो धड़े हैं। एक धड़ा चुनाव लड़ना चाहता है, जबकि दूसरा इसके पक्ष में नहीं है।
मंगलवार को कोर कमेटी की बैठक के बाद, जब मीडिया ने वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से पूछा कि क्या अकाली दल उपचुनाव लड़ रहा है या नहीं, तो मजीठिया ने कहा था कि अफवाहों पर विश्वास न करें। पार्टी का संसदीय बोर्ड जल्द ही स्थिति स्पष्ट करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल सुधार लहर के तहत भाजपा से समझौते के आधार पर उपचुनाव लड़ रहा है।


