पतंजलि के मंजन में नॉनवेज मटेरियल का होने का लगा आरोप, हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव से मांगा जवाब

NRI SANJH JALANDHAR (31 AUGUST)

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पतंजलि के उत्पाद दिव्य दंत मंजन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसमें दावा किया गया है कि उत्पाद में मांसाहारी सामग्री है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता यतिन शर्मा ने आरोप लगाया है कि कंपनी अपने ‘दिव्य दंत मंजन’ में ‘समुद्री झाग’ (कटलफिश) नामक मांसाहारी पदार्थ का इस्तेमाल करती है।

वकील यतिन शर्मा ने यह भी कहा है कि मांसाहारी सामग्री के इस्तेमाल के बावजूद उत्पाद पर ग्रीन यानी शाकाहारी लेबल लगा दिया गया है। इस पर कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद और बाबा रामदेव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

जस्टिस संजीव नरूला ने केंद्र सरकार और इस उत्पाद को बनाने वाली पतंजलि की दिव्य फार्मेसी को भी नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।

याचिकाकर्ता का दावा- उनकी भावनाएं हुईं आहत

याचिकाकर्ता यतिन ने दावा किया है कि योग गुरु रामदेव ने खुद एक वीडियो में स्वीकार किया है कि उनके उत्पाद में कटलफिश का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद कंपनी गलत ब्रांडिंग कर रही है और टूथपेस्ट को शाकाहारी बता रही है।

कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता और उनका परिवार इसलिए नाखुश है क्योंकि वे केवल शाकाहारी उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। जब से उन्हें पता चला है कि दिव्य दंत मंजन में समुद्री झाग का इस्तेमाल किया गया है, तब से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं।

मसूड़ों को मजबूत बनाने का दावा

पतंजलि की वेबसाइट के अनुसार, दिव्य दंत मंजन मसूड़ों के साथ-साथ दांतों के लिए भी सबसे शक्तिशाली औषधि है। इस टूथ पाउडर के इस्तेमाल से मसूड़े मजबूत होते हैं। इससे पायरिया (मसूड़ों से खून आना और मवाद बहना) जैसी दांतों की समस्याएं ठीक होती हैं।

पतंजलि की दवाओं के लाइसेंस पर लगी रोक हटाई गई

उत्तराखंड सरकार ने 17 मई के अपने उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य फार्मेसी के 14 उत्पादों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। उच्च स्तरीय समिति द्वारा प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद सरकार ने अपने आदेश पर रोक लगा दी।

30 अप्रैल को राज्य सरकार ने बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य फार्मेसी के 14 उत्पादों के विनिर्माण लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। उत्तराखंड सरकार के लाइसेंस प्राधिकरण ने भी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि पतंजलि आयुर्वेद उत्पादों के बारे में बार-बार भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के कारण कंपनी का लाइसेंस रोका गया है।

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