Monday, April 20, 2026

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भाजपा अपने दम पर बहुमत से पीछे, नरेंद्र मोदी के सामने पहली बार गठबंधन सरकार चलाने की चुनौती, जालंधर से चन्नी की हुई जीत

NRI SANJH JALANDHAR (4 June)

2024 के आम चुनावों ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया है, क्योंकि रुझानों में बीजेपी (BJP) बहुमत से 27 सीट दूर दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी बहुमत हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है और अब तक केवल 245 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस (Congress) 97 सीटों पर आगे है। वहीं NDA 297 और INDIA गठबंधन 228 पर आगे है। घटनाओं के इस अप्रत्याशित मोड़ ने राजनीतिक विश्लेषकों और जनता को समान रूप से सरकार के गठन के बारे में अटकलें लगाने पर मजबूर कर दिया है। इस स्थिति में यक्ष प्रश्न यह है कि यदि बीजेपी को सत्ता में लौटना है तो किंगमेकर की भूमिका कौन निभाएगा? प्रधानमंत्री मोदी ने टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू से बात की है।

वही जालंधर से कांग्रेस पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार चरणजीत सिंह चन्नी 1.75 लाख लीड लेकर जीत गए है।

कांग्रेस हुई एक्टिव
रुझानों में यदि आंकड़ों पर नजर डाले तो चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। वर्तमान में, टीडीपी 16 सीटों पर और जेडीयू 15 सीटों पर आगे चल रही है, जो कुल मिलाकर 31 से अधिक सीटें हैं। इनके समर्थन के बिना, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बहुमत के आंकड़े से पीछे रह सकता है। ऐसे में कांग्रेस एक्टिव हो गई है और एनडीए के गठबंधन सहयोगियों को रिझाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं

इस बार मुख्य मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) और कांग्रेस की अगुवाई वाले आईएनडीआईए (INDIA) के बीच हुआ। अब तक की मतगणना किसी टी-20 मुकाबले से कम नहीं रही। शुरू में एनडीए (NDA) को भारी बढ़त दिखाई गई, बाकी में आईएनडीआईए (INDIA) ने जबरदस्त वापसी की। अब फाइनल नतीजे का इंतजार है।

तीसरा कार्यकाल साबित हो सकता है काफी कमजोर
किंगमेकर के रूप में टीडीपी और जेडीयू की संभावित भागीदारी का बीजेपी और उसके नेतृत्व पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दल सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, तो नरेंद्र मोदी का संभावित तीसरा कार्यकाल काफी कमजोर साबित हो सकता है। क्षेत्रीय दलों का प्रभाव निर्णय लेने की प्रक्रिया में नई गतिशीलता ला सकता है, संभावित रूप से प्रमुख सुधारों को लागू करने में बाधा बन सकते हैं।

अपना रुख बदलने को लेकर रहे हैं सुर्खियों में
अब तक आए रुझान अगर इसी तरह नतीजों में तब्दील होते हैं तो फिर गठबंधन के इन छोटे सहयोगियों का महत्व काफी बढ़ जाएगा और शायद यह वजह है कि कांग्रेस जेडीयू और टीडीपी को अपने पाले में लाने में जुट गई है। ये दोनों ही दल पहले विपक्षी गठबंधन का हिस्सा रहे हैं और कई बार अपना रुख बदलने को लेकर सुर्खियों में रहे हैं।

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