NRI SANJH JALANDHAR (20 MAY)
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि बहुत पुण्यदायी मानी गई है। वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती के नाम से जाना जाता है. इस बार बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 23 मई दिन गुरुवार को मनाई जाएगा. यह पर्व हिंदू और बौद्ध दोनों ही धर्मों के अनुयायी मनाते हैं।
बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति के दिन के रूप में देखा जाता है और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था। वहीं हिंदू मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने अपना 9वां अवतार बुद्ध के रूप में लिया था।
कब है पूर्णिमा तिथि? (Buddha Purnima 2024)
वैशाख पूर्णिमा तिथि 22 मई दिन बुधवार को शाम 6 बजकर 48 मिनट से शुरू हो रही है और 23 मई दिन गुरुवार को शाम 7 बजकर 23 मिनट को तिथि का समापन होगा। ऐसे में पूर्णिमा तिथि का व्रत, दान पुण्य और चंद्रमा को अर्घ्य 22 मई को किया जाएगा। वहीं 23 मई को स्नान दान, पूजा पाठ आदि शुभ कार्य किए जाएंगे।
इसलिए मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा
बिहार स्थित बोधगया नामक स्थान हिंदू व बौद्ध धर्मावलंबियों के पवित्र तीर्थ स्थान है. गृह त्याग करने के बाद राजकुमार सिद्धार्थ सत्य की खोज के लिए सात वर्षों तक वन में भटकते रहे। यहां उन्होंने कठोर तप किया और अंततः वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई. तभी से यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद खीर पीकर ही अपना व्रत खोला था. इसलिए इस दिन घर में खीर बनाई जाती है और भगवान बुद्ध को खीर का प्रसाद भी चढ़ाया जाता है।


