Tuesday, September 29, 2026

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UPI चार्ज को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई को नोटिस जारी किया

UPI चार्ज को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई को नोटिस जारी किया है. साथ ही इस व्यवस्था को लागू करने पर रोक लगाने से मना किया है.2 हज़ार से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई को नोटिस जारी किया है।

हालांकि, कोर्ट ने सोमवार (28 सितंबर) को इस व्यवस्था को लागू करने पर रोक लगाने से मना कर दिया. कोर्ट ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक और NPCI से 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है.याचिकाकर्ता का कहना था कि इस व्यवस्था को बिना उचित चर्चा के लाया जा रहा है. इसे लाते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया है।

इससे छोटे व्यापारियों पर बोझ पड़ेगा. UPI के अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए दोबारा नकद भुगतान की मांग शुरू हो सकती है. यह डिजिटल अर्थव्यवस्था लागू करने के लक्ष्य पर असर डालेगा।याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि UPI के आने के बाद से काले धन के लेन-देन में कमी आई है. इसपर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन ने कहा कि यह अभी लागू होना बाकी है. 15 अक्टूबर पहला पड़ाव है।

गेटवे का इस्तेमाल करने वाले 96 फीसदी लोगों को छूट मिली हुई है. इसके बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि इस तरह की वसूली करने का एग्ज़ीक्यूटिव दायरा क्या है? अगर यह फीस होती तो हम समझ सकते थे. यह फीस नहीं है, तो फिर इसका स्वरूप क्या है? एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि डेबिट/क्रेडिट कार्ड से लेन-देन करने में लागत आती है।

UPI भी इससे अलग नहीं है. 2 ऑपरेटर यह सेवा देते हैं. एक तो बैंक हैं. यह भारत सरकार द्वारा की जाने वाली वैधानिक वसूली नहीं है. यह प्लेयर्स के बीच सेटलमेंट फीस है, जिसे NPCI सुविधाजनक बनाता है. सरकार इसमें से एक रुपया भी नहीं ले रही है.बता दें कि 16 सितंबर को 2 हज़ार से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. अंजन दत्ता नाम के याचिकाकर्ता ने दाखिल की जनहित याचिका में इसे कानून की नजर में समानता और व्यापार के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।

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