पंजाब के बहुचर्चित पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले के मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई। करीब 500 करोड़ रुपये के इस घोटाले के संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से कई कड़े सवाल पूछे।यह जनहित याचिका एडवोकेट सतबीर वालिया ने साल 2020 में दायर की थी।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच पंजाब पुलिस या विजिलेंस के बजाय केंद्रीय जांच एजेंसी CBI को सौंप दी जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।सुनवाई के दौरान, पंजाब के मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हाई कोर्ट के सामने पेश हुए। इस दौरान, कोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराज़गी ज़ाहिर की।हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा कि इस मामले में FIR दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हुई। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि पूर्व मंत्री साधु सिंह धरमसोत का नाम आरोपियों की सूची में क्यों शामिल नहीं किया गया।
हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद, मुख्य सचिव को कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी। सुनवाई के दौरान, इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका का भी ज़िक्र हुआ और कोर्ट ने सरकार से जांच की मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी।कोर्ट ने पंजाब सरकार को एक हफ़्ते का समय दिया है और उससे अगली सुनवाई के दौरान यह बताने को कहा है कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।


