अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत बड़ा सैन्य कदम उठाया है। अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा और आधुनिक विमानवाहक पोत यू.एस.एस. गेराल्ड आर. फोर्ड मध्य पूर्व की ओर रवाना कर दिया है। यह कदम ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान उनके प्रशासन के साथ समझौता नहीं करता तो परिणाम ‘बहुत दर्दनाक’ होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, यह विशाल युद्धपोत कैरेबियन से सीधे मध्य पूर्व की ओर जा रहा है, जहां यह पहले से मौजूद यू.एस.एस. अब्राहम लिंकन के साथ शामिल होगा। इस तैनाती से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य शक्ति में भारी वृद्धि होगी। यू.एस.एस. गेराल्ड आर. फोर्ड में 4,500 से अधिक चालक दल (क्रू) के सदस्य मौजूद हैं और यह गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट्स और सर्विलांस एयरक्राफ्ट से लैस है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने इसी जंगी बेड़े का इस्तेमाल पहले वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने और उन पर दबाव बनाने के लिए किया था। अब ट्रंप इसी रणनीति के जरिए ईरान को परमाणु समझौते और अन्य डील्स के लिए मजबूर करना चाहते हैं। ट्रंप ने कुछ दिन पहले ईरान के साथ बातचीत की उम्मीद जताई थी, लेकिन ओमान में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला था।
दूसरी ओर, अरब देशों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका का यह आक्रामक रुख क्षेत्र में एक बड़े संघर्ष को जन्म दे सकता है। पहले ही गाजा में इजरायल-हमास जंग के कारण मध्य पूर्व में अस्थिरता बनी हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत बड़ा सैन्य कदम उठाया है। अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा और आधुनिक विमानवाहक पोत यू.एस.एस. गेराल्ड आर. फोर्ड मध्य पूर्व की ओर रवाना कर दिया है। यह कदम ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान उनके प्रशासन के साथ समझौता नहीं करता तो परिणाम ‘बहुत दर्दनाक’ होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, यह विशाल युद्धपोत कैरेबियन से सीधे मध्य पूर्व की ओर जा रहा है, जहां यह पहले से मौजूद यू.एस.एस. अब्राहम लिंकन के साथ शामिल होगा। इस तैनाती से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य शक्ति में भारी वृद्धि होगी। यू.एस.एस. गेराल्ड आर. फोर्ड में 4,500 से अधिक चालक दल (क्रू) के सदस्य मौजूद हैं और यह गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट्स और सर्विलांस एयरक्राफ्ट से लैस है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने इसी जंगी बेड़े का इस्तेमाल पहले वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने और उन पर दबाव बनाने के लिए किया था। अब ट्रंप इसी रणनीति के जरिए ईरान को परमाणु समझौते और अन्य डील्स के लिए मजबूर करना चाहते हैं। ट्रंप ने कुछ दिन पहले ईरान के साथ बातचीत की उम्मीद जताई थी,
लेकिन ओमान में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला था।दूसरी ओर, अरब देशों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका का यह आक्रामक रुख क्षेत्र में एक बड़े संघर्ष को जन्म दे सकता है। पहले ही गाजा में इजरायल-हमास जंग के कारण मध्य पूर्व में अस्थिरता बनी हुई है।



