संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र के सातवें दिन कांग्रेस सांसद मनीष तिवाड़ी ने वोटर लिस्ट, EVM की विश्वसनीयता और नकदी हस्तांतरण पर कड़े सवाल उठाए।मनीष तिवाड़ी ने चुनाव आयोग (EC) द्वारा कई राज्यों में कराई जा रही समरी रिवीजन ऑफ इलेक्टोरल रोल्स (SIR) के अधिकार पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि न तो संविधान में और न ही किसी कानून में चुनाव आयोग को SIR करने का कोई कानूनी अधिकार है। सेक्शन-21 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि SIR तभी किया जा सकता है जब किसी क्षेत्र में वोटर लिस्ट में कोई खास गड़बड़ी हो, जिसे सुधारना जरूरी हो।तिवाड़ी ने मांग की कि सरकार सदन के पटल पर रखे कि किन-किन क्षेत्रों में क्या खामियां मिलीं, जिनके कारण SIR की जरूरत पड़ी।
उन्होंने यह भी पूछा कि अगर SIR हो रहा है तो मशीन-रीडेबल लिस्ट क्यों नहीं दी जा रही।कांग्रेसी सांसद ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की विश्वसनीयता पर भी संदेह जताया। लोगों के मन में यह शक है कि क्या EVM से छेड़छाड़ की जा सकती है। इस शक को दूर करने के लिए उन्होंने दो तरीके सुझाए:1. या तो 100% VVPAT हो,2. या फिर पेपर बैलट से चुनाव करवाए जाएं।उन्होंने सरकार से पूछा कि EVM का सोर्स कोड किसके पास है – “चुनाव आयोग के पास या उन कंपनियों के पास?”
इसके अलावा तिवाड़ी ने चुनाव के समय लोगों के खातों में सीधे पैसे भेजने पर कड़ा ऐतराज जताया। इसे उन्होंने लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ और भारत सरकार के राजस्व की दुरुपयोग बताया। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि संसद गंभीरता से विचार कर एक प्रावधान जोड़ दे कि जिस सरकार का GDP अनुपात में कर्ज 20 प्रतिशत से ज्यादा हो, वह कोई भी नकद हस्तांतरण नहीं कर सकती।
मनीष तिवाड़ी ने सदन के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं:1. चुनाव से पहले डायरेक्ट कैश ट्रांसफर को तुरंत रोका जाए।2. SIR (समरी रिवीजन) की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए।3. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून में संशोधन हो, जिसमें नियुक्ति समिति में राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI को शामिल किया जाए।
तिवाड़ी ने जोर देकर कहा कि आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने एंटी-डिफेक्शन कानून पर भी सवाल उठाए, जिसमें बार-बार संशोधनों के कारण यह 2014 के बाद “मेगा डिफेक्शन एक्टिविटी” बन गया है।उन्होंने कहा कि पिछले 78 सालों में सबसे बड़ा चुनाव सुधार राजीव गांधी सरकार ने किया था, जब 18 साल से अधिक उम्र वालों को वोट का अधिकार दिया गया।


